महीना: मई 2012

एक्टर से बने चलली रिपोर्टर..

मीडिया वाले भलही अपना रिपोर्टिंग प्रोफेशन से उकताइल लउकस बाकिर अभिनेत्रियन में रिपोर्टर बने क क्रेज़ बदस्तूर कायम बा. एह कड़ी में नया नाम जुड़ल बा राखी त्रिपाठी के जे अपना अगिला फिलिम “विध्वंस” में एगो तेज़ तर्रार...

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महानायक खातिर धड़कल साधना सिंह क दिल

दिल जवान होखे के चाहीं उमिर के एहमें का! अब ‘नदिया के पार’ फेम साधना सिंह के देख लीं. उम्र के एह मोड़ पर उनुका प्यार हो गइल बा भा कहीं कि उनुकर दिल केहू चोरा लिहले बा. आ ई दिल चोर हउवें दोसर केहू ना बलुक महानायक कुणाल...

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बसन्त फागुन

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से आखिरी प्रस्तुति) – डा॰अशोक द्विवेदी धुन से सुनगुन मिलल बा भँवरन के रंग सातों खिलल तितलियन के लौट आइल चहक, चिरइयन के! फिर बगइचन के मन, मोजरियाइल अउर फसलन के देह गदराइल बन हँसल नदिया के...

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गीत

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 23वी प्रस्तुति) – रिपुसूदन श्रीवास्तव जिन्दगी हऽ कि रूई के बादर हवे, एगो ओढ़े बिछावे के चादर हवे. जवना घर में ना पहुँचे किरिन भोर के जवना आँखिन से टूटे ना लर लोर के केकरा असरे...

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गीत

– मनोज भावुक बोल रे मन बोल जिन्दगी का ह … जिन्दगी का ह . आरजू मूअल, लोर बन के गम आँख से चूअल आस के उपवन बन गइल पतझड़, फूल -पतई सब डाल से टूटल … साध- सपना के दास्तां इहे , मर के भी हर बार — मन के अंगना में...

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