महीना: जुलाई 2012

कबहुं केहु सब्जी तरकारी के बारे में सोचल?

– जयंती पांडेय एक दिन बाबा लस्टमानंद बड़ा दुखी हो के रामचेला से कहले, हो भाई जदि तोहरा थरिया में परल तरकारी ठीक ना बनल त तूं का अपना मेहरारू के गरियइबऽ कि उल्टा सीधा बोलबऽ? ना नु. लेकिन केहु सब्जी के भावना के खेयाल ना करे....

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राष्ट्रपति चुनाव के तैयारी में रामचेला

– जयंती पांडेय कई दिन से बाबा लस्टमानंद अपना संघतिया राम चेला से हरकल रहत रहले. अनमुन्हसारे रामचेला चलि आवस आ बाबा के घरे अखबार आते सवाचस कि का हो बाबा राष्ट्रपति चुनाव में का हो ता? एक दिन बाबा औंजिया पूछले कि आखिर तूं ई...

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