महीना: जनवरी 2013

बिजली में तड़प केतना होला अनजान बदरिया का जानी!

देश के बड़ गीतकार गोपालदास नीरज लिखले बाड़े – “गीत अगर मर जायेंगे तो क्या यहाँ रह जायेगा एक सिसकता आसुओं का कारवां रह जायेगा ” गोपालगंज (बिहार) जिला के कटेया अंचल में जनमल राधा मोहन चौबे ‘अंजन’ जी...

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सिंहासन खाली करो कि ट्वीटर आया है

याद बा हॉस्टल के ऊ रात जब बिजली चल जात रहुवे. एगो कवनो कोना से आवाज उठी आ थोड़ही देर में पूरा हॉस्टल तरह तरह के आवाज से गूंजे लागी. कुछ लोग त एहले आवाज निकाली कि मन के डर खतम होखे त बाकी लोग ओह हुँआ हुँआ में आपन आवाज मिलावे लागी....

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हिन्दू धर्म ह कि सम्प्रदाय?

एह विवाद में पड़े से पहिले चली तनी कंप्यूटर का भाषा में कुछ बतिया लिहल जाव. कंप्यूटर इस्तेमाल करे वाला हर आदमी जानेला कि साफ्टवेयर दू तरह के होला. एगो ला पइसा ना देबे पड़े आ ऊ ओपन सोर्स कहाला. दोसरका के खरीदे के पड़ेला. जवना के...

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बतकुच्चन ‍ – ९२

समाज में भड़इता आ मीडिया में भाँड़ बहुते मिल जइहे. अब भड़इता त ऊ जे भाड़ा देव बाकि भाँड़? आ फेर भाँड़ आ भँड़ुआ में का फरक? भँड़सार त सुनलही होखब सभे जहाँ अनाज भूंजाला. मीडिया में भँड़सारो होला जहाँ तरह तरह के खबरन के भुंजल जाला बाकि आजु...

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पोल खोलवाये में ‘इंटरेस्टेड’ लोग

– जयंती पांडेय रामचेला जबसे आम आदमी पार्टी चाहे कहीं ‘आप’ में शामिल भइले तबसे बड़ा संकट हो गइल कि कई गो अपरिचित लोग उनका घर के चारु इयोर दिन भर मेड़रात रहत रहे. रामचेला डेरा गइले कि का बात हऽ. ऊ आपन परेशानी बाबा लस्टमानंद...

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