महीना: मार्च 2013

जोरु के भाई आ ममहर के बात

भउजी हो! का बबुआ ? ओह पट्टी के लोग बहुते परेशानी में पड़ गइल बा. काहे बबुआ? एक त अपना जीजा से परेशान रहबे कइल लोग तबले ममहरो से बवाल चहुँप गइल. केहू का मुँह से बकार नइखे फूटत. काहे फूटी ? ओह लोग के त खुश होखे के चाहीं कि सगरी...

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बतकुच्चन १०१

“संतोख अतने बा / कि गाँव अपना में अझुराइल / अपने में परेशान / अपने में मगन / अतने में गील / कि हिनिके उड़ा देब! / हुनके भठा देब! / उनकर मामर हेठ करब! / बहुत जल्दिये गोटी सेट करब!!” ना, ना. गलत समुझला के जरूरत नइखे....

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