पाँच कवर भीतर, तब देवता पितर : बतंगड़ – 97
एगो जमाना उहो रहुवे राजीव गाँधी का बेरा जब जनता में ई बहुते प्रचलित हो गइल रहल कि सौ में निनान्बे...
Read Moreएगो जमाना उहो रहुवे राजीव गाँधी का बेरा जब जनता में ई बहुते प्रचलित हो गइल रहल कि सौ में निनान्बे...
Read Moreपुरनका जमाना से सुनत आइल बानी स ई तंज कि – बूड़ल वंश कबीर के जमले पूत कमाल. पूत अगर कपूत हो...
Read Moreजस-जस दिन नियराइल जात बा तस-तस राजनीति के रंग अउरो सियाह होखल जात बा. एक बाति त सभके मानही के पड़ी...
Read Moreअगिला लोकसभा चुनाव में अब सालो भर नइखे रहि गइल. अबकि के चुनाव देश के जीवन मरण के सवाल होखे जा रहल...
Read Moreजबरा मारबो करे आ रोवहूं ना देव. एह देश में हिन्दू के हालत अइसन हो गइल बा कि ओकरा पर होखत अत्याचार...
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