राजनीति के झालमूढ़ी
- टीम अंजोरिया

राजनीति के झालमूढ़ी


आजु के मथैला तय करत में हमहूं घचपचा गइनी कि ‘राजनीति के झालमूढ़ी’ लिखीं कि ‘झालमूढ़ी के राजनीति’ ? फेर तय कइनी कि राजनीति के झालमूढ़ी बेसी सही रही। हाल के विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी एगो दुकान पर जा के झालमूढ़ी का खइलें कि झालमूढ़ी फैशन में आ गइल। आम मनई के समय काट स्नैक्स पर बड़का बड़का बइठकन में चरचा चले लागल। बाकिर एह लेख में पश्चिम बंगाले ले सीमित नइखीं रहे वाला एहीसे ई लेख झालमूढ़ी के राजनीति ना होके झालमूढ़ी के राजनीति बन गइल बा।

पिछला महीना देश के चार गो राज्यन आ एगो केन्द्र शासित प्रदेश के विधानसभन के चुनाव भइल। असम आ पश्चिम बंगाल में भाजपा के शानदार सफलता मिलल। पुडुचेरी में राजग (एनडीए) दुबारा सरकार बनावे ला बढ़िया बहुमत पा लिहलसि। केरलम में कांग्रेस साथे बनल यूडीएफ के विशाल बहुमत मिल गइल। बाकिर तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा बन गइल। पुडुचेरी में मुख्यमंत्री उहे रहीहें जे पहिले से बाड़न। असम में हिमन्ता बिस्व सरमा के दुबारा मुख्यमंत्री बनल करीब करीब तय बा आ पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायक मण्डल के बइठक चल रहल बा मुख्यमंत्री के नाम तय करेला। वइसे आम मनई के सोच त इहे बा कि शुभेन्दु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनावल सबले सही रही। बाकिर भाजपा का बारे में कुछऊ तय से ना कहल जा सके। एहिजा अइसन अइसन इन्द्र गद्दी पर विराजमान बाड़ें जिनका हर तपस्वी से डर लागे लागेला। तेलंगाना में बंडी संजय कुमार आ तमिलनाडु में अन्नामलाई के बढ़न्ती देखि के भाजपा के इन्द्र लोग सकपका गइल रहुवे आ एह दुनु जने के किनारे लगा दीहल गइल। परिणाम जवन भइल तवन सभका सोझा बा, बस ओह इन्द्र लोग के छोड़ के। बाकिर आजु के लेख ना त भाजपा पर बा ना कांग्रेस पर। कांग्रेसो के केरलम में बढ़िया बहुमत मिल चुकल बा बाकिर उहो तय नइखे कर पावत कि केकरा के मुख्यमंत्री बनावे। हो सकेला कि राजस्थान, छतीसगढ़, आ कर्नाटके वाला नाटक एहिजो देखे के मिले।

आजु के लेख देश के राजनीति के झालमूढ़ी पर बा। जे झालमूढ़ी खइले होखी उहे एकर सवाद बता पाई। झालमूढ़ी में अतना तरह के सवाद मिलावल रहेला कि कवना के नाम लीहल जाव बुझाव ना। हँ झाल (मरीचा के तीताई) आ मूढ़ी के अुनपात सबले बेसी होला । देश के राजनीति के सवाद एही झालमूढ़ी का तरह होला। पश्चिम बंगाल में चुनाव हार चुकल ममता बनर्जी इस्तीफा देबे ला तइयार ना भइली। एगो संवैधानिक संकट जइसन हालात बन गइल बा। हालांकि राज्यपाल विधानसभा भंग कर चुकल बाड़न आ मंत्रीमंडल के बरखास्त। बाकिर मुख्यमंत्री के बरखास्त करे के आदेश नइखे निकलल। बूझी त उहो बरखास्त हो चुकल बाड़ी आ देखीं त उनुकर मामिला तय नइखे। कवनो राज्यपाल बिना मंत्रीमंडल के सलाह के सरकार चला ना सके जबले राष्ट्रपति शासन के एलान ना हो जाव। आ ओहू हालात में कार्यकारी सलाहकार मुख्यमंत्री बना दीहल जाला। मामला एही ले साफ नइखे कइलन राज्यपाल कि अगर जे कहीं मामिला कोर्ट कचहरी में जाव त निकले के कोना बाचल रहो।

असल मुद्दा बा तमिलनाडु के। त्रिशंकु विधानसभा का हालात में बड़का बड़का जानकार विश्लेषक कानूनविद राजनीतिज्ञन दू गोल में बँटा के रह गइल बाड़न। एक गोल के कहना बा कि एह हालात में सबले बड़का दल के सरकार बनावे के नेवता मिल जाए के चाहीं। ई लोग उदाहरण देत बा कि कर्नाटक में येदिउरप्पा के सरकार बनावे दीहल गइल रहुवे जबकि उनुका लगे बहुमत ना रहुवे। केन्द्रो में अल्पमत के सरकार बन चुकल बाड़ी सँ आ साम-दाम-दण्ड-भेद का सहारे नैतिकता के पलीता लगा के कांग्रेसो अइसन सरकार चला चुकल बिया। दोसरा गोल के लोग के कहना बा कि दिल्ली में एक बेर सबले बड़का दल रहला का बादो भाजपा के सरकार बनावे के नेवता ना मिलल रहुवे आ कर्नाटक आ केन्द्र सरकार के उदाहरण सोझा बा कि अइसनका सरकार शायदे टिकाऊ होखेले।

हालांकि कुछ लोग के इहो कहना बा कि अपना अति उत्साह में टीवीके के जोसेफ विजय राज्यपाल का लगे सरकार बनावे के दावा पेश करत में गलती कर दिहलन आ गठबन्हन सरकार बनावे खातिर अपना आ पांच गो कांग्रसिया विधायकन के नाम अपना चिट्ठी में डाल दिहले रहलन। अगर ऊ सबले बड़हन दल होला का नाते अगर सरकार बनावे के दावा पेश कइले रहतन त शायद नेवता मिलियो गइल रहीत।

त कुछ लोग के इहो कहना बा कि जइसहीं ऊ कांग्रेस से समर्थन ले के सरकार बनावे के दावा कइलन तइसहीं भाजपा आपन खेल खेल दिहलसि आ मामिला लटक गइल। ई लेख लिखतो लिखत अगर कवनो फैसला फेर-बदल हो जाव त हम नइखीं जानत। झालमूढ़ी के सवाद भला केहू आसानी से बताइयो कइसे सकेला?

 

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