ममता के खुला एलान – हम हारले नइखीं त इस्तीफा काहे देब?
why resign while undefeated

चुनाव परिणाम आ गइला का बाद आजु मंगल का साँझे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपना कालीघाट वाला घर पर पत्रकारन के बोला के आपन बात कहली। कहली कि ऊ हरली ना, उनुकर करीब 100 सीट लूट लीहल गइल। चुनाव आयोग के विलेन बतवली।
(पूरा प्रेस कान्फ्रेन्स के वीडियो यूट्यूब से ले के नीचे डाल दिहने बानी। चूंकि उनुकर भाषण बंगला में रहल आ हिन्दी मीडिया चैनल के लिंक दिहले बानी, एहसे हमरा लागल कि एकर मोट मोट बात भोजपुरी में बता दीं त दुनिया में भोजपुरी मे पहिलका वेबसाइट अंजोरया डॉटकॉम के पाठकन से न्याय होखी। अनुवाद से कवनो विवाद ना होखे एहसे लिंको डाल दिहले बानी।)
इस्तीफा का बारे में पत्रकारन के सवाल का जबाब में ममता कहली – ‘केन पदत्याग करब? आमरा तो हारिनी। जोर करे वोट लूट करा हयेछे. इस्तीफा देउयार प्रश्न केन उठेछे?”
मतलब कि ऊ कहली कि इस्तीफा काहे देब? हम त हरनी ना। हमार त वोट लूट लिहल गइल। इस्तीफा देबे के सवाले कहाँ उठत बा?
चुनाव आयोग के विलेन बतावत ममता कहली कि कमीशन के मिलीभगत से उनुकर एक सौ सीट लूट लीहल गइल। वोट में हार-जीत होखेला बाकिर वोट त भइल ना। हम हरनी ना, ऊ सब वोट लूट लिहलें।
कहली कि हमहन के लड़ाई त भाजपा से रहबे ना कइल। निर्वाचन आयोग एहिजा एगो करियाह इतिहास बना दिहलसि। कमीशन जनता के मताधिकार लूट लिहलसि। वोट से पहिले सभ जगहा रेड डालल गइल। सगरी प्रशासन बदल दीहल गइल। बीजेपी आ कमीशन का बीच साँठगाँठ रहुवे। आ एही में प्रधानमंत्री आ स्वराष्ट्रो मत्री शामिल रहलें।
बतवली कि एह हार के बाद पार्टी के रणनीति का होखी से बतावल ना जाई। कहली कि अबहीं एह बारे में पत्रकारन के कुछ ना बतइहन।
एह प्रेस कांफ्रेंस में ममता का साथे उनुकर भतीजा अभिषेक बनर्जी, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, फिरहाद हाकिम, चन्द्रिमा भट्टाचार्य, डेरेक ओ ब्रायन, आ कल्याण बन्द्योपाध्याय शामिल रहलन।
बतवली कि ऊ रास्ता पर रहे-लड़े वाली हई आ रास्ते पर रहीहन। अतना दिन कुरसी पर बइठनी, बहुत कुछ बर्दाश्त कइनी, अब अउर बरदाश्त ना करब। अब हम आजाद चिरई हो गइल बानी। साधारण मनई। हर अत्याचार का खिलाफ लड़ब।
बतवली कि बीजेपी विरोधी इण्डी गठबन्हन के सगरी सहयोगी उनुका के फोन क के आपन समर्थन दिहल लोग। आवे वाला दिन में हम अउर शक्तिशाली होखब। अखिलेश आजु आवल चाहत रहलन। हम कहनी कि काल्हु आवऽ। एक संगे बइठल जाई आ गठबन्हन के बरियार बनावल जाई।
कहली कि साल 2004 से अइसन ना देखनी। बरीस 1972 का बार में सुनले बानी, देखले नइखी। उनुकर इशारा प्रान्त में कुछ जगहा पर तृणमूल के आफिसन पर होखे वाला हमलन का ओर रहल। इहो कहली कि बीजेपी हमेशा रही ना। जब जाई त ओकरे साथे अइसने कइल जाई।
ममता त इहां ले कहली कि मतगणना केन्द्र पर उनुका के लतियावल गइल। धक्का मारल गइल। जब कवनो औरत का साथे अइसन भइल त बाकी लोगन का साथे का भइल होखी एकर अंदाजा लगावल जा सकेला। कहली कि भाजपा 200 से बेसी सीट जीतले बिया ई देखि के जगहे जगहा उनुका आफिसन पर हमला होखे लागल बा। गणतंत्र का अइसने होखेला?
ममता धिरवली कि फेरू लवटब। हमार लड़ाई चलत रही। इहो बतवली कि उनुका गोल के तथ्य अनुसंधानी कमिटी एह चुनाव परिणाम पर विचार करी आ सगरी गड़बड़ी सोझा ले आवल जाई।


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