Category: भाषा

भोजपुरी पंचायत के फरवरी अंक में

अधिकतर रचना हिंदी में रहे वाला एह पत्रिका के अबकी के अंक में बिहार आ दिल्ली के राजनीतिक चरचा का अलावे, भोजपुरी गौरव उमाशंकर सिंह के निधन से जुड़ल खबर, छपरे के कोठियाँ नराँव गाँव के समाजसेवी हरिदयालबाबू के निधन पर लेख, दिल्ली के...

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बतकुच्चन – ९५

सियन आ सिवान. सोचनी कि आजु के बतकुच्चन एही पर कर लीं. रउरा सोचब कि सियन आ सिवान में का संबंध? एगो कपड़ा के सिलाई, दोसर सीमा के अंत. एह दुनु में कवन रिश्ता हो सकेला? बाकि देखीं त दुनु में बहुते करीबी मिल जाई. कपड़ा के सियन टूटल आ...

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बतकुच्चन ‍ – ९४

मेरे मन कछु और है, बिधना के कछु और. सोचले त रहीं कि अबकी के बतकुच्चन में एकरा सेंचुरी के चरचा करब बाकि बाबा लस्टमानंद जी दोसर ओर खींच ले गइलन. अब मन से भा बेमन से उनकरे बात करे के पड़ी. पिछला अतवार के बाबा अपना गजइला के चरचा करत...

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बतकुच्चन ‍ – ९३

पिछला पख बलात्कार का नामे रहल. जेनिए देखी तेनिए लोग बलात्कार का खिलाफ धरना प्रदर्शन में लागल रहुवे. सोचनी कि काहे ना हमहू एही पर कुछ बतकुच्चन कर ली. फेर पता ना कब मौका मिले ना मिले. आन समय में बलात्कार के चरचा फूहड़ मानल जा सकत...

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बतकुच्चन ‍ – ९२

समाज में भड़इता आ मीडिया में भाँड़ बहुते मिल जइहे. अब भड़इता त ऊ जे भाड़ा देव बाकि भाँड़? आ फेर भाँड़ आ भँड़ुआ में का फरक? भँड़सार त सुनलही होखब सभे जहाँ अनाज भूंजाला. मीडिया में भँड़सारो होला जहाँ तरह तरह के खबरन के भुंजल जाला बाकि आजु...

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