श्रेणी: भाषा

बतकुच्चन ‍ – ८६

बेमौसम बरसात भा हँसुआ का बिआह में खुरपी के गीत. दिवाली का मौका पर फुलझरी पटाखा का जगहा कादो पानी क खेल होखत बा, जेकरे देखीं उहे केहू ना केहू पर अछरंग लगावे में लागल बा. अछरंग लांछन के कहल जाला, केहू पर दोस लगवला के अछरंग लगावल...

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बतकुच्चन ‍ – ८५

सँवास, हहास, भड़ास, आ बतास. एह चारो में कवनो आपसी रिश्ता ना होखला का बावजूद आजु के बतकुच्चन एहनी पर करे के बा. बतास के मतलब बहत तेज हवा त होखबे करेला बाकिर ओहु ले खास मतलब होला हवा से पसरे वाला बेमारियन से. फलाना के बतास लाग गइल...

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जिए भोजपुरी! बाकिर कइसे?

ई एगो बड़हन सवाल बा. आ एकर जवाब कवनो एक आदमी ना दे सके. एहसे ई सवाल रउरा सभका सोझा राखत बिया अँजोरिया कि एह सवाल के जवाब खोजल जाव. रउरा सभे से निहोरा बा कि आपन राय विस्तार से अँजोरिया के भेजीं, एहिजा छोटहन कमेंट दे के ना. सभकर...

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बतकुच्चन ‍ – ८४

गुन आ ग्यान, गुनी आ ग्यानी. के बड़ छोट कहत अपराधा. बाकिर बिना गुन के ग्यान आ बिना ग्यान के गुन ढेर कामे ना आ पावे. गुन आ गुण एक होइओ के एक ना होखे. गुण दोष वाला गुण आ हुनर वाला गुन. अब एह गुन के केहु के गुण मानल जा सकेला बाकिर हर...

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भोजपुरी गीत के भाव भंगिमा

– डा॰अशोक द्विवेदी कविता का बारे में साहित्य शास्त्र के आचार्य लोगन के कहनाम बा कि कविता शब्द-अर्थ के आपुसी तनाव, संगति आ सुघराई से भरल अभिव्यक्ति ह. कवि अपना संवेदना आ अनुभव के अपना कल्पना शक्ति से भाषा का जरिए कविता के...

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