किताबि आ पत्रिका के परिचय – 3
एकलव्य “एकलव्य” डॉ. गोरखनाथ ‘मस्ताना’ के एगो प्रबंध काव्य हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2012 में खुराना पब्लिशिंग हाउस, 94, मानक बिहार, दिल्ली-110092 से भइल बा. एकर कीमत 150 रुपिया बाटे. नौ सर्ग...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 27, 2016 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
एकलव्य “एकलव्य” डॉ. गोरखनाथ ‘मस्ताना’ के एगो प्रबंध काव्य हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2012 में खुराना पब्लिशिंग हाउस, 94, मानक बिहार, दिल्ली-110092 से भइल बा. एकर कीमत 150 रुपिया बाटे. नौ सर्ग...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 26, 2016 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
तीन डेगे त्रिलोक “तीन डेगे त्रिलोक” गंगा प्रसाद ‘अरुण’ के भोजपुरी हाइकु संग्रह हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2013 में सिंह्भूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद्, कृष्णा भवन, विवेक नगर,...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 25, 2016 | पुस्तक चर्चा |
जिनिगी पहाड़ हो गईल “जिनिगी पहाड़ हो गईल” डॉ. गोरखनाथ ‘मस्ताना’ के भोजपुरी कविता संग्रह हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2008 में इंद्रप्रस्थ भोजपुरी परिषद्,...
Read MorePosted by Editor | जुलाई 11, 2016 | कविता, पुस्तक चर्चा, समीक्षा, साहित्य |
भोजपुरी साहित्य से हमार पहिलका परिचय जवना रचना से भइल तवन रहल हरीन्द्र हिमकर जी के लिखल खण्डकाव्य...
Read MorePosted by Editor | मार्च 22, 2016 | पुस्तक चर्चा, सरोकार, साहित्य |
– डा. अशोक द्विवेदी गँवई लोक में पलल-बढ़ल मनई, अगर तनिको संवेदनशील होई आ हृदय-संबाद के मरम बूझे वाला होई, त अपना लोक के स्वर का नेह-नाता आ हिरऊ -भाव के समझ लेई. आज काकी का मुँहें एगो जानल-सुनल पुरान गीत सुनत खा हम एगो दोसरे...
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