श्रेणी: पुस्तक चर्चा

भोजपुरी किताब छपवा चुकल लेखक प्रकाशकन से एगो निहोरा

बहुत खुशी के बात बा कि रउरा आपन भोजपुरी किताब छपववले बानी. अपना ओह किताब के विज्ञापन रउरा अँजोरिया परिवार के नयका बेबसाइट प दीं. विज्ञापन शुल्क सिर्फ एकबार देबे के होखी आ ऊ विज्ञापन हर साल रउरा से पूछ के बिना कवनो शुल्क लिहले...

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कइसन रही अगर अँजोरिया भोजपुरी किताब प्रकाशन का मैदान में उतरे?

किताब के लिखो जब केहू छापही वाला नइखे. किताब के छापो जब केहू खरीदही वाला नइखे. किताब कइसे खरीदे केहू जब किताब लिखइबे ना करी, छपबे ना करी. किताब कइसे खरीदाव जब घर खरची चलावले मुश्किल होखल जात बा. समस्या विकट बा. कहाँ से शुरू कइल...

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बुरा जो देखन मैं चला मुझ से बुरा न कोय!

भोजपुरी पंचायत के जुलाई २०१३ के अंक सामने बा आ ओकरा के पढ़त घरी प्रभाकर पाण्डेय के लिखल व्यंग्य रचना के एगो लाइन पर आँख अटक के रहि गइल कि “बुरा जो देखन मैं चला, मुझसे बुरा ना कोय”. फेर याद आ गइल कहीं पढ़ल एगो चरचा. ओह...

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