अनबोलता अँखियन के सवाल
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 13वी प्रस्तुति) – कृपाशंकर प्रसाद प्रकाश आ हम कइ बेरि होटल में संगे संगे होटलियवले रहनी जा। जब मांसाहार करे के होखे तबे होटलियाईं जा – ‘ई खस बात रहे।’ शुरुए से हम मार्क...
Read MorePosted by Editor | Feb 5, 2012 | कहानी, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 13वी प्रस्तुति) – कृपाशंकर प्रसाद प्रकाश आ हम कइ बेरि होटल में संगे संगे होटलियवले रहनी जा। जब मांसाहार करे के होखे तबे होटलियाईं जा – ‘ई खस बात रहे।’ शुरुए से हम मार्क...
Read Moreपिछला बेर पोजिटिव थिंकिंग के बात सामने आइल रहुवे से आजु ओहिजे से शुरू करत बानी. पोजिटिव थिंकिंग, माने कि सकारात्मक सोच, माने कि सकारथ सोच ओह सोच के कहल जाला जवन आदमी के मनोरथ पूरा करे, ओकर ईच्छा पूरा करे भा ओकर सोचल सगरी काम...
Read MorePosted by Editor | Jan 30, 2012 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 12वी प्रस्तुति) – आनन्द संधिदूत ओनइसवीं सदी के आखिरी दशक आवत-आवत ददरी के मेला बलिया में एगो दुर्घटना घट गइल. भइल ई कि कातिक के प्रमुख नहान आ बकरीद एके दिन पड़ गइल. नतीजा ई भइल...
Read MorePosted by Editor | Jan 30, 2012 | कविता, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 11वी प्रस्तुति) – मनोकामना सिंह शाम के, घर लवट के अइला पर देख के चेहरा उदास पूछली माधो के मेहरारू रउरा मुँह काहे लटकवले बानीं? बंगला के पाँच अस बनवले बानीं ? कहलें माधो, ”का...
Read MorePosted by Editor | Jan 30, 2012 | कविता, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 10वी प्रस्तुति) – गंगा प्रसाद अरुण नानी हो, बहुते इयाद आवेला तोहार खास करके तब जबकि पापा-मम्मी दूनो लोग चलि जाला अपना-अपना आफिस-स्कूल बन कइके हमनी के ताला में. जानेलू, घर में...
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