बतकुच्चन – ३३
बोले वाला बोलता आ चुप रहे वाला चुप्पा कहाला. बाकिर चुप्पा अतना आसान ना होले. कई बेर त ऊ चुप्पा शैतान होला. ढेला मार के निर्दोस जइसन चुप्पा मार के बइठल शैतान पर जल्दी केहू शको ना करे आ उ भितरे भीतर मुसुकात सब कुछ देखत रहेला....
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