श्रेणी: साहित्य

लोक कवि अब गाते नहीं – १३

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) बारहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं त्रिपाठी जी के चरचा आ इहो कि लोक कवि कइसे घबड़इले जब पता चलल कि उनुका भतीजा के एड्स हो गइल बा. ओकरा के तुरते बंबई भिजवा दिहले एह...

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राजा आ लोक कवि

– डा॰अशोक द्विवेदी सिंहासन पर बइठल राजा के अझुराइल रहला खातिर जुटावल जाला कतने सरंजाम. जइसे मारकाट के खेल भुखाइल, खूनी बाघ से निहत्था आदमी क लड़ाई. जइसे नाच गाना के महफिल आ शेरो-शायरी से बड़ाई खास नर्तकियन के पेशी. पाँच...

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लखनऊ पुस्तक मेला में भोजपुरिया अमन के विमोचन

लखनऊ के नौंवा राष्ट्रीय पुस्तक मेला में भोजपुरी के साप्ताहिक पत्रिका “भोजपुरिया अमन” के विमोचन करत आकाशवाणी के पूर्व निर्देशक आ मशहूर साहित्यकार मदन मोहन मनुज सिन्हा कहले कि लोक साहित्य वाली भाषा सभन के धीरे धीरे...

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हजार का नोट पर छाप दिहल गाँधी

– शैलेश मिश्र हम अन्ना ना भारत सरकार के समर्थक हईं करोड़ो का आबादी में बेबस बेकार हईं जनम से आजुले भठियरपन के संरक्षक हईं. जनम लिहनी त नर्स मँगलसि चार आना डाक्टर बर्थ सर्टिफिकेट ला लिहले फेर चार आना. स्कूल में नाम लिखाई में...

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बतकुच्चन – २८

प्रकृति के एगो नियम विज्ञान में पढ़ावल जाला कि ऊ गँवे गँवे सब कुछ के समतल सपाट करे में लागल रहेले, चाहे ऊ पहाड़ होखे भा कवनो झील पोखरा गड़हा. अलग बाति बा कि पता ना का होई जब सब कुछ समतल हो चुकल रही. शायद तब धरती पर पानी के प्रलय आ...

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