Category: साहित्य

सुमना के बाबा

– देवेन्द्र कुमार सउंसे घर में कोहराम मच गइल. सुमना के बाबा के मिजाज राति खानि एकाएक खराब हो गइल. सभे लोगन के चेहरा प हवाई उड़त रहे. अब का होई? अतना राति के ऊहां के अस्पताल ले जाए के परी. काहेंकि एह घड़ी तो कवनो डाक्टर...

Read More

भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक

बावन पेज के पत्रिका, चार पेज विज्ञापन के, चार पेज संपादकीय सामग्री, बाँचल चउवालीस पेज. तरह तरह के तेरह गो संपादक बाकिर प्रूफ आ भाषा के गलतियन के भरमार का बीच भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक में भोजपुरी में मिलल...

Read More

भरपेट भोजन

– विनोद द्विवेदी सड़क का किनारे बान्हल बकरन के झुण्ड में कुछ बकरा बीमार आ उदास लागत रहलन स. एगो बकरा दूइए दिन पहिले खरीद के आइल रहे. उपास खड़ा दोसरा बकरा का तरफ देख के जइसे कहल चाहत रहे कि ना जाने कवना घड़ी में हमार जनम...

Read More

वीर विशाल

– डॉ॰ उमेशजी ओझा एगो छोटहन गांव में दीपक अपना धर्मपत्नी सुरभी आ एगो 14 बरीस के बेटा विशाल के साथे रहत रहले. दीपक के कतही नोकरी ना लागल रहे. एहसे ऊ अपना परिवार के जीविका खातिर एगो ठिकेदार का लगे मजदुरी करत रहले. दिन भर...

Read More

दू गो डाक्टरी कविता

– डा. कमल किशोर सिंह हम  रटीला रोजे  ‘हिपोक्रेटिस’ हृदय में, धरि ‘धनवंतरी’ ध्यान, हम रटी ला रोजे रोगान शेषान, रोगान शेषान. छछनावे, तडपावे, फेर दुहि लेला प्राण, बचल ना केहू – चाहे बच्चा, बुढ़,...

Read More

Recent Posts