Category: साहित्य

भोजपुरी पंचायत के नवम्बर 14 के अंक

– – ओमप्रकाश सिंह आजुए ईमेल से मिलल भोजपुरी पंचायत पत्रिका के नवम्बर 2014 अंक देखि के मन मिजाज खुश हो गइल. अगर भोजपुरी से छोह के बात हटा दिहल जाव त पत्रिका के कलेवर बहुते स्तरीय बा. सोना पर सोहागा वाला बाति होखीत अगर...

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मॉरीशस : आपन बोली-आपन लोग

– मनोज श्रीवास्तव केहू के जब आपन खाली घर-दुआर आ आपन गाँव जवार छुटेला त मन केतना भारी हो जाला आ तब त आपन देसे छुटल रहे. ओह घरी कवनो सुख से केहू आपन घर-दुआर, गाँव-जवार भा देसे छोड़ के परदेस थोड़े गइल रहे लोग. खाली अपना परिवार...

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कुलछनी

– डॉ॰ उमेशजी ओझा नीलम के गोड़ धरती प ना पड़त रहे. खुशी के मारे एने से ओने उछलत कुदत चलत रही. एह घरी के सभ लइकी आ लइका के बड़ी इन्तजार रहेला. नीलमो आखिर उछल कुद काहे ना करस. उनकर बिआह जे ठीक भइल रहे. नीलम के मन में खुशी के...

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फेरू उठल भोजपुरी के संवैधानिक मान्‍यता के मांग

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित भोजपुरी समाज दिल्‍ली के एगो कार्यक्रम में काल्हु 21 अक्टूबर 2014 के समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे के लिखल हिन्दी किताब “तलाश भोजपुरी भाषायी अस्मिता की” के विमोचन कइल गइल. एह मौका प स्वाभाविक रूप से...

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आवऽ दियावा जरावऽ भोजपुरी के भईया

– ओेमप्रकाश अमृतांशु शंख नाद गरजन सुनावऽ, मिलके जोर लगावऽ आवऽ दियावा जरावऽ, भोजपुरी के भईया . ओका-बोका तिन तड़ोका, घुघुआ के हई माना तार काटो-तरकुल काटो, ढ़ेरन खेल-खजाना, चुट्टा-चुट्टी, बुढ़िया कब्ड्डी, से नेहिया लगावऽ आवऽ...

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