बतकुच्चन – ९९
लाजे भवहि बोलसु ना, सवादे भसुर छोड़सु ना. अब एह बाति पर भड़कला के कवनो जरूरत नइखे. ई कहाउत हमार बनावल ना ह आ जमाना से चलल आवत बा. इहो बाति नइखे कि हमरा फगुनाहट लाग गइल बा. काहे कि फागुन के आहट बतावे वाला बयार अब भेंटात नइखे...
Read Moreलाजे भवहि बोलसु ना, सवादे भसुर छोड़सु ना. अब एह बाति पर भड़कला के कवनो जरूरत नइखे. ई कहाउत हमार बनावल ना ह आ जमाना से चलल आवत बा. इहो बाति नइखे कि हमरा फगुनाहट लाग गइल बा. काहे कि फागुन के आहट बतावे वाला बयार अब भेंटात नइखे...
Read More– केशव मोहन पाण्डेय दहशत के किस्सा त दर्दनाक होइबे करी। ग़म के दौर में ख़ुशी इत्तेफाक होइबे करी।। माचिस के तिल्ली कबले खैर मनाई आपन, जरावल काम बा त खुद खाक होइबे करी।। जेकर काम होखे भरम उतारल चौराहा पर, ओकरो बदन पर कौनो...
Read Moreवरिष्ठ पत्रकार आ भोजपुरी के चर्चित कथाकार गिरिजाशंकर राय “गिरिजेश” भोजपुरी माटी आ बोली-बानी के संवेदनशील रचनाकार रहलन. उनका कहानियन में भोजपुरी जीवन जगत के जथारथ आ जथारथ का भीतर के साँच उद्घाटित भइल.” ई विचार...
Read Moreमशहूर भोजपुरी साहित्यकार गिरिजाशंकर राय गिरिजेश के निधन शनिचर का दिने बनारस में हो गइल जहाँ उनुकर इलाज चलत रहुवे. छिहत्तर साल के गिरिजेश राय लमहर समय से बेमार रहलन आ इलाज खातिर उनुका के गोरखपुर से बनारस भेजल गइल रहुवे. निधन का...
Read More– ओमप्रकाश अमृतांशु हम बच्चा दिल के सच्चा आईऽ गइलीं शरण में . हे ! विद्या के भंडारिणी , द नव कृपा कृपालिनी , बुद्धि – सद्बुद्धि कर द हमरो , हे माँ ! वीणावादिनी . तू दानी हे! वरदानी आईऽ गइलीं शरण में . हमहूँ ज्ञानी...
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