Category: साहित्य

भोजपुरी पंचायत पत्रिका के मार्च २०१३ अंक

एह अंक में भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता का गंभीर मुद्दा पर पत्रिका संपादक कुलदीप कुमार के संपादकीय में राजनेता लोग के चेहरा के मुखौटा उतारे के कोशिश भइल बा भोजपुरियन का सभा में आ के झूठ आश्वासन दिहल आ निकलते भुला गइला के शिकायत...

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पोसुआ

– डा॰अशोक द्विवेदी दूबि से निकहन चउँरल जगत वाला एगो इनार रहे छोटक राय का दुआर पर. ओकरा पुरुब, थोरिके दूर पर एगो घन बँसवारि रहे. तनिके दक्खिन एगो नीबि के छोट फेंड़ रहे. ओही जा ऊखि पेरे वाला कल रहे आ दू गो बड़-बड़ चूल्हि. दुनों...

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बतकुच्चन – ९९

लाजे भवहि बोलसु ना, सवादे भसुर छोड़सु ना. अब एह बाति पर भड़कला के कवनो जरूरत नइखे. ई कहाउत हमार बनावल ना ह आ जमाना से चलल आवत बा. इहो बाति नइखे कि हमरा फगुनाहट लाग गइल बा. काहे कि फागुन के आहट बतावे वाला बयार अब भेंटात नइखे...

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केशव के गजल – 3

– केशव मोहन पाण्डेय दहशत के किस्सा त दर्दनाक होइबे करी। ग़म के दौर में ख़ुशी इत्तेफाक होइबे करी।। माचिस के तिल्ली कबले खैर मनाई आपन, जरावल काम बा त खुद खाक होइबे करी।। जेकर काम होखे भरम उतारल चौराहा पर, ओकरो बदन पर कौनो...

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गिरिजाशंकर राय के श्रद्धांजलि

वरिष्ठ पत्रकार आ भोजपुरी के चर्चित कथाकार गिरिजाशंकर राय “गिरिजेश” भोजपुरी माटी आ बोली-बानी के संवेदनशील रचनाकार रहलन. उनका कहानियन में भोजपुरी जीवन जगत के जथारथ आ जथारथ का भीतर के साँच उद्घाटित भइल.” ई विचार...

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