हे ! विद्या के भंडारिणी
– ओमप्रकाश अमृतांशु हम बच्चा दिल के सच्चा आईऽ गइलीं शरण में . हे ! विद्या के भंडारिणी , द नव कृपा कृपालिनी , बुद्धि – सद्बुद्धि कर द हमरो , हे माँ ! वीणावादिनी . तू दानी हे! वरदानी आईऽ गइलीं शरण में . हमहूँ ज्ञानी...
Read More
