Category: साहित्य

बीत गइल शिवरात्रि बाबा..

– अभयकृष्ण त्रिपाठी बीत गइल शिवरात्रि बाबा नाही अइलऽ तू, पडल रह गइल भांग धतूरा नाही खइलऽ तू | का दिल्ली का कलकत्ता का काशी का मथुरा, तोहरा आड़ में खा रहल बा हर केहू भांग धतूरा, जहर के खाके जहर उगीलत नाही देखलऽ तू, बीत गइल...

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जिए भोजपुरी ! बाकिर कइसे?

पिछला दस साल से भोजपुरी के वेबसाइट चलावत अपना अनुभव से इहे सिखले बानी कि भोजपुरी में वेबसाइट चलावल बहुते मुश्किल काम होला. सबसे पहिले भोजपुरी में वेबसाइट शुरू भइल रहे अँजोरिया. एकरा बाद बहुते वेबसाइट अइलीं स. कुछेक त बहुते मजगर...

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भोजपुरी पंचायत पत्रिका के मार्च २०१३ अंक

एह अंक में भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता का गंभीर मुद्दा पर पत्रिका संपादक कुलदीप कुमार के संपादकीय में राजनेता लोग के चेहरा के मुखौटा उतारे के कोशिश भइल बा भोजपुरियन का सभा में आ के झूठ आश्वासन दिहल आ निकलते भुला गइला के शिकायत...

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पोसुआ

– डा॰अशोक द्विवेदी दूबि से निकहन चउँरल जगत वाला एगो इनार रहे छोटक राय का दुआर पर. ओकरा पुरुब, थोरिके दूर पर एगो घन बँसवारि रहे. तनिके दक्खिन एगो नीबि के छोट फेंड़ रहे. ओही जा ऊखि पेरे वाला कल रहे आ दू गो बड़-बड़ चूल्हि. दुनों...

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बतकुच्चन – ९९

लाजे भवहि बोलसु ना, सवादे भसुर छोड़सु ना. अब एह बाति पर भड़कला के कवनो जरूरत नइखे. ई कहाउत हमार बनावल ना ह आ जमाना से चलल आवत बा. इहो बाति नइखे कि हमरा फगुनाहट लाग गइल बा. काहे कि फागुन के आहट बतावे वाला बयार अब भेंटात नइखे...

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