तोंहे गीत कऽ कसम
– अक्षय कुमार पाण्डेय आन्हीं में, पानी में, जरत रहे दिया, हिया माने ना हार, जिया ठाने ना रार – तोंहे गीत कऽ कसम. धीरे धीरे जमल अन्हार कुल्ह पघिल जाई सोन किरिन आके जब धरती से मिल जाई. चढ़ ऊपर, ऊपर चढ़, थाके ना जोर...
Read More– अक्षय कुमार पाण्डेय आन्हीं में, पानी में, जरत रहे दिया, हिया माने ना हार, जिया ठाने ना रार – तोंहे गीत कऽ कसम. धीरे धीरे जमल अन्हार कुल्ह पघिल जाई सोन किरिन आके जब धरती से मिल जाई. चढ़ ऊपर, ऊपर चढ़, थाके ना जोर...
Read More– डा॰ कमलेश राय हम अइना हर आँगन क हर चेहरा के रखवार हईं राख सहेज त एगो हम, तोरऽ त कई हजार हईं. हिय में सनेह से राखी लां दुख के पीड़ा सुख के उछाह निरखी ला रोज थिर रहि के, जिनिगी के सगरी धूप छाँह. छन में अधरन के मीठ हँसी, खन...
Read More– शिवजी पाण्डेय “रसराज” हाथ जोरि करतानी बिनति तहार, मईया शारदा. सुनी लिहितू हमरी पुकार, मईया शारदा.. गरे कुंड हार शोभे, श्वेत रंग सारी, नीर क्षीर जाँचे वाला हंस बा सवारी, बीनवा बजाई के जगइतू संसार, मईया शारदा....
Read More“भोजपुरी दिशाबोध के वैचारिक साहित्यिक पत्रिका “पाती” एगो अइसन रचनात्मक मंच ह जवन भोजपुरी भाषा साहित्य के एगो नया पहिचान दिहलसि. एकरा रचनात्मक आंदोलन से जुड़ के अनेके लेखक राष्ट्रीय स्तर पर आपन पहचान...
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