श्रेणी: कविता

अजगर

– संतोष कुमार गाँव के गाँव लील रहल बा नीमिया के छाँव पानी के पाँव कुल्ही लील गइल अजगर. भले ओकर नाम शहर बा बाकिर ओकरा मे बड़ा जहर बा जहर बा छल कपट के, दुराव के, तनाव के विष बा धोखा के, चपलूसी के, बिखराव के उजड़ गइल गाँव गोरी...

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डेढ़ अछरी पाठशाला

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ पेट आ पाटी का बीच खाई ना भर सकला से रूसल रहि गइली सुरसती हमरा बंश से आ हमरा अंश से जामल कवनो बिरवा पनिगर ना हो सकल हम ना बो सकलीं सेंउठियाइल ‘सुखिया’ का कोख में मेधा के ब्लाॅक...

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दू गो गीत

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ पहिल गीत कवन गाईं एह गीतन का गाँव में पाहुन-सन मन रहल लजाइल. धनखेती में फूटल सोना रुपनी बइठल बीनत मोना जाँता से जिनिगी लपटाइल छंद झर रहल घर का कोना पाकड़ का पतइन से चिरइन के शब्द झरल...

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कबीर

– डॉ० हरीन्द्र ‘हिमकर’ मत पूछीं कथा जलम के कुछ कथा गढ़े दीं हमके ई बोलत चलल कबीरा हीरदा से निकलल हीरा. हे माई ! त जनि बोलऽ ऊ दरद कहीं जनि खोलऽ आँखिन का पानी से तू अपना अँचरा के धो लऽ. अपना छप्पर छान्ही में गंगा...

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फाग गीत २

-डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. बुढ़वो जोबन राग अलापी ली अङड़ाई चशमो के ऊपर भउजी काजर लगवाई बुनिया...

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