Category: कविता

ई सब रोग गरीबी के

– डॉ. कमल किशोर सिंह उत्तर टोला बर तर, बईठल चबुतर पर, धनिया ढील हेरवावत रहे, सुबुकत सब सुनावत रहे – कतना दुःख सुनाईं बहिनी ई ना कभी ओराला, आ धमकेला दोसर झट से जसहीं एगो जाला. भादो में भोला के कसहूँ गोडवा गइल छिलाय....

Read More

मचल बा हाय खलबली

– ओ.पी .अमृतांशु जीतल मंगरुआ बो मुखिया चुनाव में  मचल बा हाय खलबली, देखऽ गली -गली. छाका छोड़ाई दिहलस एमे. बीए पास के  मुखिया जी खुरुपी ले के चलीं दिहलें घास के निपट-अनाड़ी भारी उठल बीया गावँ में   मचल बा हाय खलबली, देखऽ...

Read More

कभी कभी हमरा दिल में खयाल आवेला.

– अभयकृष्ण त्रिपाठी कभी कभी हमरा दिल में खयाल आवेला. भोजपुरिया बानी हमरा भोजपुरिये भावेला, अंगिका, वज्जिका, मगही मैथिलि सब हमरे नगीना बा, भोजपुरी जइसन मिश्री बोलला में नाही कवनो दाम बा, भोजपुरिया के सफ़र शुरू भी भोजपुरिये...

Read More

फागुन के आसे

– रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई....

Read More

अमौसा के मेला

– कैलाश गौतम प्रसिद्ध कवि कैलाश गौतम के एगो रचना उहें के आवाज में प्रस्तुत कइल जा रहल बा जवन एगो कवि सम्मेलन में पेश भइल रहे. पूरा ट्रांस्क्रिप्ट जस के तस दिहल जा रहल बा काहे कि ओकर अनुवाद के कवनो जरुरत नइखे लागत. कवि अपना...

Read More

Recent Posts