फागुन के आसे
– रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई....
Read More– रामरक्षा मिश्र विमल फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. डर ना लागी बाबा के नवकी बकुली से अङना दमकी बबुनी के नन्हकी टिकुली से कनिया पेन्हि बिअहुती कउआ के उचराई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई. फागुन के आसे होखे लहलह बिरवाई....
Read More– कैलाश गौतम प्रसिद्ध कवि कैलाश गौतम के एगो रचना उहें के आवाज में प्रस्तुत कइल जा रहल बा जवन एगो कवि सम्मेलन में पेश भइल रहे. पूरा ट्रांस्क्रिप्ट जस के तस दिहल जा रहल बा काहे कि ओकर अनुवाद के कवनो जरुरत नइखे लागत. कवि अपना...
Read More– ओ.पी .अमृतांशु बरसे रंगवा हुलसे मनवा , नील गगनवा रंगाइल ! महँगिया खूब ईठलाइल , आइल होली आइल रे !! मस्त फगुनवा मस्ती के दिनवा , झूमेला गेठ जोडिके सरकारवा, भइल करोडो हॉय रे घोटाला सउँसे खजाना लूटाइल ! महँगिया खूब ईठलाइल...
Read More– अभयकृष्ण त्रिपाठी आईल बाटे फिर से बाबा शिवरात्रि के त्यौहार, भोले बाबा सुनी लिह बिनती हमार, मत दीह केहु के भी कवनो उपहार, भोले बाबा, भोले बाबा, भोले बाबा हमार II पापियन के नाश के महिमा सुनाईले, भस्मासुर के लीला भी भूले...
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