Category: कविता

फाग गीत

– रामरक्षा मिश्र विमल लागेला रस में बोथाइल परनवा ढरकावे घइली पिरितिया के फाग रे. धरती लुटावेली अँजुरी से सोनवा बरिसावे अमिरित गगनवा से चनवा इठलाले पाके अँजोरिया जवानी गावेला पात-पात प्रीत के बिहाग रे. पियरी पहिरि झूमे सरसो...

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आइल होली आइल रे

– ओ.पी .अमृतांशु बरसे रंगवा हुलसे मनवा , नील गगनवा रंगाइल ! महँगिया खूब ईठलाइल , आइल होली आइल रे !! मस्त फगुनवा मस्ती के दिनवा , झूमेला गेठ जोडिके सरकारवा, भइल करोडो हॉय  रे घोटाला सउँसे खजाना लूटाइल ! महँगिया खूब ईठलाइल...

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शिवरात्रि के त्यौहार

– अभयकृष्ण त्रिपाठी आईल बाटे फिर से बाबा शिवरात्रि के त्यौहार, भोले बाबा सुनी लिह बिनती हमार, मत दीह केहु के भी कवनो उपहार, भोले बाबा, भोले बाबा, भोले बाबा हमार II पापियन के नाश के महिमा सुनाईले, भस्मासुर के लीला भी भूले...

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एगो नवगीत

– रामरक्षा मिश्र विमल फूटल भाग लोराइल अँखिया मन पितराइल. असरा के अङना में सपनन के आवाजाही दिन बदलल का दिल बदलल मन हो जाला घाही अलगवला पर मुहर लगल जियरा छितराइल. थथमत आवेला बसंत मन सहमे लागल बा शीशा के पँजरा जाए में सोचे...

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कुछ दोहा

-चंदन मिश्र डाढ़ी जर अब गाछ के, बाटे रहल बटोर। आखिर फल कइसे मिली, पत्ता पत्ता चोर॥ जर से ले के डाढ़ तक, केहू ना कमजोर। केहू अधिका ले गइल, केहू थोरका थोर॥ जब घरहिं के लोग कइल, आपन देस गुलाम। जिअते जी जे मर गइल, ओकरा से का काम॥ पानी...

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