एगो नवगीत
– रामरक्षा मिश्र विमल फूटल भाग लोराइल अँखिया मन पितराइल. असरा के अङना में सपनन के आवाजाही दिन बदलल का दिल बदलल मन हो जाला घाही अलगवला पर मुहर लगल जियरा छितराइल. थथमत आवेला बसंत मन सहमे लागल बा शीशा के पँजरा जाए में सोचे...
Read More– ओ.पी .अमृतांशु जा रे झूम के बसंती बहार पिया के मती मार पिया बसेला मोर परदेसवा में . सरसों के फुलवा फुलाईल आमवा के दाढ़ मोजराईल , अंगे-अंगे मोर गदाराइल हाय!उनुका ना मन में समाईल , लाली होठवा भइल टहकार पिया के मती मार...
Read Moreबक्सर में छह फरवरी के आयोजित भोजपुरी कवि सम्मेलन के संबोधित करत बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष डा॰ रविकांत दूबे कहलें कि भोजपुरी के प्रतिष्ठा दिआवे खातिर ऊ सब कुछ करे के तइयार बाड़न आ एहमें सभकर सहयोग के आह्वान ऊ अपना कविता के...
Read More– अभयकृष्ण त्रिपाठी अरसा बाद एक बार फिर कलम उठवले बानी, जानत बानी हम आग से बारूद सटवले बानी II दीप क रोशनी से अनंत के नाता बा, अन्हरन से देखे क बात हमारा ना सुहाता बा, हर केहू जान के एक दूसरा के लूट रहल बा, डाकू के मंत्री...
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