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लस्टमानंद के चुनावी रणनीति

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद अबकी चुनाव में खड़ा होखे के फैसला कऽ लेहले बाड़े आ ओकरा खातिर रणनीति बनावे में जुटल बाड़े. अब उनका खेलाफ बड़का दल के बड़ बड़ नेता खड़ा बा लोग आ ओकरा पर से अण्णा बाबा के चर लोग चारू इयोर घूम...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १६

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) पन्दरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि कइसे गणेश तिवारी झूठ के साँच आ साँच के झूठ बनावे का तिकड़म में लागल रहेले. अबकी उनुका तिकड़म के माध्यम बनल बा पोलादन जे आपन...

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लोकपाल के नाना प्रोडक्ट

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद एगो अखबार में छपवावे खातिर लोकपाल पर एगो लेख लिखले. लेख का रहे एकदम से तमाशा रहे. ऊ लिखले कि लोकपाल एगो अइसन फल हऽ जे ईमानदारन के मीठ आ बेईमानन के खट लागेला. जनता के खट मीठ दूनो. सरकारी अफसरन...

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अपने देश में सौतेलापन के दंश झेलत भोजपुरी

भारत के एक हजार साल पुरान देशज भाषा भोजपुरी अपने देश में आजु सौतेलापन के शिकार बिया. राजनेतवन आ केंद्र सरकार के अनदेखी का चलते भोजपुरी दसियन बरीस से संवैधानिक मान्यता खातिर तरसत बिया. खास त ई बा कि दुनिया के सोलह देश के 20 करोड़...

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चाय के महातम

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद कहले रामचेला से कि गाय आ चाय में का फरक बा. फरक तऽ ना बुझाइल बाकी बुड़बक अस मुंह बा के लगले तिकवे एने ओने. फेर सांस ले के कहले कि हमरा तऽ मालूम नइखे लेकि बतकुच्चन वाला बाबू ओम परकास जी से पूछ...

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