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लोक कवि अब गाते नहीं – १३

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) बारहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं त्रिपाठी जी के चरचा आ इहो कि लोक कवि कइसे घबड़इले जब पता चलल कि उनुका भतीजा के एड्स हो गइल बा. ओकरा के तुरते बंबई भिजवा दिहले एह...

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बाढ़ि खातिर व्याकुल नेता जी

– जयंती पांडेय का हो बाबा, काल्हु गइल रहीं नेताजी से भेंट करे. बड़ा उदास आ मायूस लागत रहले. हर बतिये में कहीं ना कहीं से बाढ़ के घिंच ले आवत रहले. हमरा कुछ ना बुझाइल. हम त बूझनी कि कहीं अण्णा बुढ़ऊ के भ्रष्टाचार मेटावे वाला...

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इग्नू में भोजपुरी भाषा में सर्टिफिकेट कार्यक्रम

पहली सितम्बर, 2011 का दिने इग्नू के ” भोजपुरी भाषा, साहित्य संस्कृति केंद्र” के पाठ्यक्रम बनावे खातिर पहिलका बईठक भइल. भोजपुरी भाषा में ‘सर्टिफिकेट कार्यक्रम’ से जुड़ल पाठ लेखकन के एह बईठक में देश के कोना...

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भ्रष्टाचार आ सदाचार के रिश्ता

– जयंती पांडेय अण्णा के अनशन देखि सुनि के बेचैन रामचेला बाबा लस्टमानंद से कहले, बाबा ई सब का हो ता ? बाबा कहले, ई गीता के नया ज्ञान के अवसर ह, भ्रष्टाचार मेटावे के महाभारत में दुनु इयोर से मोर्चा तइयार ब. दुनु इयोर के लोगन...

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दू गो गजल

– रामरक्षा मिश्र विमल 1 शहर में घीव के दीया जराता रोज कुछ दिन से सपन के धान आ गेहूँ बोआता जोग कुछ दिन से जहाँ सूई ढुकल ना खूब हुमचल लोग बरिसन ले ढुकावल जात बाटे फार ओहिजा रोज कुछ दिन से छिहत्तर बेर जुठियवलसि बकरिया पोखरा...

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