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एतना उतार चढ़ाव में सांच कहाँ ?

– जयंती पांडेय बात चलल लस्टमानंद से कि साँच का होला. बाबा कहले साँच त हमरा के लइकाईं से हरान कइले बा. लईकाईं में पढ़नी कि बुद्ध आ महाबीर साँच के खोज में घर बार त्याग दिहले. बाकी ए घरी त साँच के खोजे खातिर दुनिया भर के जाँच...

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बड़ा पुरान ह ई ट्रांसफर के धंधा

– जयंती पांडेय यूपी में अफसरन के लगातार बदली माने ट्रांसफर के खबर से उबियाइल रामचेला लगले कहे बाबा लस्टमानंद से कि, हो बाबा ! ई ट्रांसफरन के खबर सुनि के मन आजिज आ गइल बा. जइसही केहू से जान पहिचान भइल कि ओकर बदली हो जा ता....

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आखिर कइसे लड़ल जाई भ्रष्टाचार से ?

– जयंती पांडेय बाबा रामदेव आ अण्णा हजारे का देखादेखी नाँव कमाये के गरज से बाबा लस्टमानंदो एगो दल बनवले “विलेज दल”, आ शुरू कइले मीटिंग. कई गाँव के लोग एकट्ठा भइल. लमहर लमहर भाषण भइल, लोग के चेहरा भ्रष्टाचार का...

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मारीशस आ भोजपुरी

भोजपुरी दुनिया में एगो फैशन बा कहे कि सात समु्न्दर पार गइल गिरमिटीहा मजदूरन के परिवार से बसल मारीशस मे आजुले भोजपुरी भाषा, संस्कार, आ संस्कृति जिन्दा बा. ई बाति कहि के हमनी का अपना आप के तसल्ली दिहिला कि चलऽ कहीं ना कहीं भोजपुरी...

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लोक कवि अब गाते नहीं – ११

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) दसवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सम्मान मिलला बाद अपना गाँवे चहुँपल लोक कवि के एगो पंडित के कहल नचनिया पदनिया के बात कतना खराब लागल रहे. बाकिर चेयरमैन साहब का...

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