आवऽ लवटि चलीं जा!
डा॰ अशोक द्विवेदी के लिखल उपन्यास अँजोरिया में धारावाहिक रुप से प्रकाशित. भाई का डंटला आ झिरिकला...
Read Moreडा॰ अशोक द्विवेदी के लिखल उपन्यास अँजोरिया में धारावाहिक रुप से प्रकाशित. भाई का डंटला आ झिरिकला...
Read Moreकठिन परिश्रम से यहां तक पहुंचे भोजपुरी फिल्मों के चहेते सितारे राजीव सिंह दिनकर ने छोटे पर्दे पर बड़ी छलांग लगाई है. हमेशा कुछ नया करने और सीखने की ललक पाले राजीव सिंह दिनकर इन दिनो सबसे बड़े नेटवर्क माने जाने वाले दुरदर्शन के...
Read More– डा॰ अशोक द्विवेदी भयावह आ भकसावन लागे वाला ऊ बन सँचहूँ रहस्यमय लागत रहे. जब-तब उहाँ ठहरल अथाह सन्नााटा अनचीन्ह अदृश्य जीव जन्तु भा पक्षियन का फड़फड़ाहट से टूट जात रहे. थोरिके देर पहिले फेड़ का एगो लटकल डाढ़ि से लपटाइल लटकल...
Read MorePosted by Editor | दिसम्बर 12, 2014 | उपन्यास, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
– डा॰ अशोक द्विवेदी गंगा नदी पार होत-होत अँजोरिया रात अधिया गइल रहे. दुख आ पीरा क भाव अबले ओ लोगन का चेहरा प’ साफ-साफ देखल जा सकत रहे. छछात मृत्यु का सामने से, सुरक्षित लवटि आइल साधारन बात ना रहे. संजोग अच्छा रहे कि असमय आ...
Read Moreदुर्गम बन पहाड़न का ऊँच-खाल में जिए वाला आदिवासी समाज के सहजता, खुलापन आ बेलाग बेवहार के गँवारू, जंगलीपना भा असभ्यता मानेवाला सभ्य-शिक्षित समृद्ध समाज ओहके शुरुवे से बरोबरी के दरजा ना दिहलस. समय परला पर ओकर उपयोग जरूर कइलस. खुद...
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