का लिखीं, का छोड़त जाईं : बतंगड़ – 82
– ओ. पी. सिंह हर बेर जब बतंगड़ लिखे बइठिलें त मन में कवनो ना कवनो खाका बन चुकल रहेला आ बाति...
Read More– ओ. पी. सिंह हर बेर जब बतंगड़ लिखे बइठिलें त मन में कवनो ना कवनो खाका बन चुकल रहेला आ बाति...
Read More– ओ. पी. सिंह लोकतन्त्र, डेमोक्रेसी, में लोक-लाज ना रहि जाव त ओकरा दैत्यतन्त्र, डेमॉनक्रेसी,...
Read More– ओ. पी. सिंह एह घरी देश में एकही बात सुनाई देत बा – एकरा के हटावल बहुते जरुरी हो गइल...
Read More– ओ. पी. सिंह सबसे पहिले त रउरा सभे के रामनवमी के हार्दिक बधाई आ शुभकामना. बहुते सौभाग्य से...
Read More– ओ. पी. सिंह फगुआ बीत गइल बा आ अब चइत चलत बा. परम्परा का हिसाब से चइत में फगुआ ना गआव बाकिर...
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