भतार ना पूत, भर लिलार भभूत – बतंगड़ – 115
भतार ना पूत, भर लिलार भभूत (बतंगड़ – 115) मथैला देख के रउरो बूझिए गइल होखब कि ई “नारी मुई,...
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Read Moreदिल्ली मे पीएचन के प्रदर्शन – बतंगड़ 114 बहुते हल्ला रहल कि छह जून के दिल्ली दहल जाई, मोदी...
Read Moreपदलसि कि पदलन – बतंगड़ 109 सवाल सुन के कुछ लोग के खराबो लागी कि ई कवन तरीका ह जवना में...
Read Moreएगो छप्पन इहो – बतंगड़ 107 छप्पन के कई गो खासियत होला। कतहीं छप्पन भोग के आनन्द लीहल...
Read Moreकुकुरन के रोटी खियावत रहे के चाहीं – बतंगड़ 106 आ जब हम कहऽतानी कि कुकुरन के रोटी...
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