माई
– डॉ राधेश्याम केसरी हमरे से खनदान पटल बा, जिनिगी से जज्बात जुड़ल बा हम हमार, घर दुअरा खातिर...
Read More– पाण्डेय हरिराम जिनगी माई के अँचरा के गाँठ जइसन होले. गाँठ खुलत जाले. कवनो में से दुख त कवनो में से सुख निकल आवेला. हमनी का अपना दुख में भा सुख में भुलाइल रहीले. ना त माई के अँचरा याद रहेला ना ओह गाँठ के खोल के माई के...
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