नारी
– अभयकृष्ण त्रिपाठी पहचान के जरुरत नइखे हम नारी बानी मानी न मानी हर केहु पर भारी बानी || लुट रहल बा अस्मत चारो ओरि, जानत बानी, नारी भइल नारी के दुसमन इहो मानत बानी, कोख मारीं आ सर तान के केतनो चलीं रउआ जग के जनावर से परिचय...
Read More– संतोष कुमार कलजुग के करिखा में कुल्ही करिया गइल बा जात-पात के बीच खेत अरिया धरिया गइल बा...
Read More– संतोष कुमार अक्कितम अच्युतन नम्बूदिरी के मलयालम रचना (पुल्ककोदि) “फतिंगा” के अंगरेजी अनुवाद के भोजपुरी उल्था : आगि में कूदि के मरे खातिर भा आगिये खाए के लालसा में आगि भीरी जुटान कइ के दउडल जा रहल बाड़ें छोटहन...
Read More(१) आजादी के जश्न मनउला के दिन बाटे आज गली गली झंडा फहरउला के दिन बाटे आज जे सीना पर गोली खा के आजादी ले आइल ओ बीरन के गाथा गउला के दिन बाटे आज । सत्तावन में गदर भइल उ घाही मन के पीर रहल जंजीर गुलामी के तोड़ला के उ पहिला...
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