कुछ कविता
– दिलीप पाण्डेय (1) आसरा के बादल बरखे वाला बादल सगरी छाइल खिल गइल चेहरा मुरझाइल अब ना कहीं सुखार होई घर घर में बहार होई बंद जुबानो अब बोली अभागनो के उठी डोली वृद्ध नयन का बावे आस संकट अब ना आई पास झंझट से चेहरा रहे झुराइल...
Read Moreपिछला दिने 23 नवंबर के दिल्ली के पालम में बोलावल गइल भोजपुरी कविता गोष्ठी के अध्यक्षता करत डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना जब आपन पंक्ति सुनवनी कि, राजघाट पर गीता कुरान लेके जे किरिया खाई उहे लोग सत्ता पाई, उहे लोग सता पाई ! त सभे लोग...
Read More– ओेमप्रकाश अमृतांशु शंख नाद गरजन सुनावऽ, मिलके जोर लगावऽ आवऽ दियावा जरावऽ, भोजपुरी के भईया . ओका-बोका तिन तड़ोका, घुघुआ के हई माना तार काटो-तरकुल काटो, ढ़ेरन खेल-खजाना, चुट्टा-चुट्टी, बुढ़िया कब्ड्डी, से नेहिया लगावऽ आवऽ...
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