Tag: कविता

दू गो कानून बा

– डी आनन्द पानी से सस्ता गरीबन के खून बा, लागऽता देसवा में दू गो कानून बा. जे बा छूछे ओकरा, काहे केहू पूछे, दुनिया-जहान, बिना पइसा के सून बा. केस लटियाइल ब‌ा, सरसो के तेल बिना, बड़का लोगवा खातिर, तेल जैतून बा. ओकर सभे...

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भौकाली

– अशोक द्विवेदी उहो बजावे ले एकतारा ! तुलसी, सूर प’ मूड़ी झाँटसु ले कबीर के नाँव, सरापसु भदभाव के टाफी चाभत कबिता कहनी लीखसु नारा ! उहो बजावे ले एकतारा ! पढ़सु फारसी, बेचस हिन्दी उर्दू में अंगरेजी बिन्दी अनचितले जब...

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कुछ कविता

– दिलीप पाण्डेय (1) आसरा के बादल बरखे वाला बादल सगरी छाइल खिल गइल चेहरा मुरझाइल अब ना कहीं सुखार होई घर घर में बहार होई बंद जुबानो अब बोली अभागनो के उठी डोली वृद्ध नयन का बावे आस संकट अब ना आई पास झंझट से चेहरा रहे झुराइल...

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पुरवइया आ भोजपुरी लेखक संघ के भोजपुरी कविता संगोष्ठी

पिछला दिने 23 नवंबर के दिल्ली के पालम में बोलावल गइल भोजपुरी कविता गोष्ठी के अध्यक्षता करत डा॰ गोरख प्रसाद मस्ताना जब आपन पंक्ति सुनवनी कि, राजघाट पर गीता कुरान लेके जे किरिया खाई उहे लोग सत्ता पाई, उहे लोग सता पाई ! त सभे लोग...

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आवऽ दियावा जरावऽ भोजपुरी के भईया

– ओेमप्रकाश अमृतांशु शंख नाद गरजन सुनावऽ, मिलके जोर लगावऽ आवऽ दियावा जरावऽ, भोजपुरी के भईया . ओका-बोका तिन तड़ोका, घुघुआ के हई माना तार काटो-तरकुल काटो, ढ़ेरन खेल-खजाना, चुट्टा-चुट्टी, बुढ़िया कब्ड्डी, से नेहिया लगावऽ आवऽ...

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