Tag: कविता

सासु कहे कुलबोरनी

– डा॰ शत्रुघ्न पाण्डेय, बाबूजी के हम रहुईं आँखि के पुतरिया राखसु करेजवा में मोर महतरिया आवते ससुरवा अघोरनी रे, सासु कहे कुलबोरनी. हवे मतवाली ह कुलछनी मतहिया सासुजी कहेली खेलवाड़ी ह भुतहिया परल कपार बिया चोरनी रे, सासु कहे...

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गौरैया

– केशव मोहन पाण्डेय जइसे दूध-दही ढोवे सबके सेहत के चिंता करे वाला गाँव के ग्वालिन हऽ गौरैया एक-एक फूल के चिन्हें वाला मालिन हऽ। अँचरा के खोंइछा ह विदाई के बयना हऽ अधर के मुस्कान ह लोर भरल नैना हऽ। चूडि़हारिन जस सबके घर के...

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नयका साल

– डॉ. कमल किशोर सिंह एक साल अउर सरक गइल, कुछ छाप आपन छोडि के. भण्डार भरि के कुछ लोगन के, बहुतो के कमर के तोड़ी के. प्रकोप परलय के दिखा दुनिया के कुछ झकझोरी के. आईं बिदाई करीं एकर, दसो नोहवा जोड़ी के, आ स्वागत करीं नव वर्ष...

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दू गो कानून बा

– डी आनन्द पानी से सस्ता गरीबन के खून बा, लागऽता देसवा में दू गो कानून बा. जे बा छूछे ओकरा, काहे केहू पूछे, दुनिया-जहान, बिना पइसा के सून बा. केस लटियाइल ब‌ा, सरसो के तेल बिना, बड़का लोगवा खातिर, तेल जैतून बा. ओकर सभे...

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भौकाली

– अशोक द्विवेदी उहो बजावे ले एकतारा ! तुलसी, सूर प’ मूड़ी झाँटसु ले कबीर के नाँव, सरापसु भदभाव के टाफी चाभत कबिता कहनी लीखसु नारा ! उहो बजावे ले एकतारा ! पढ़सु फारसी, बेचस हिन्दी उर्दू में अंगरेजी बिन्दी अनचितले जब...

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