ह का जिन्दगी
– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ लोर ढारत निहारत रहे राह जे, ओह अँखियन से पूछीं ह का जिन्दगी। पाके आहट जे दउड़ल दरद दाब के, ओह दिल से ई पूछीं ह का जिन्दगी।। पीड़ पिघले परनवा के जब जब पिया हिया हहरे मिलन लागी तड़पे जिया...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ लोर ढारत निहारत रहे राह जे, ओह अँखियन से पूछीं ह का जिन्दगी। पाके आहट जे दउड़ल दरद दाब के, ओह दिल से ई पूछीं ह का जिन्दगी।। पीड़ पिघले परनवा के जब जब पिया हिया हहरे मिलन लागी तड़पे जिया...
Read More– अशोक कुमार तिवारी जीए द जनता के चाहे गरदन जाँत मुआव, हटे देश बपौती तहरे जइसे मन चलावऽ. स्वास्थ सड़क शिक्षा तीनोें के धइले बा बदहाली, तोहरा एकर कवन फेर बा काटऽतारऽ छाल्ही. एहिजा जरे बदन घाम में, ओहिजा चले एसी, इहाँ तियन...
Read More(1) मन के चाकरी मन के चाकरी कइनी जीवन सगरी अब का करीं, हमके अब त बता द। मन के चाकरी कइनी जीवन सगरी॥ एने.ओने जानी, कुछू ना बुझाला, हवे ई ओसारा कि ह ई सिवाला। मन के चाकरी कइनी जीवन सगरी॥ खेत हवे कि बारी, कि गाँव के दुआर, नदिओ ना...
Read More– ओमप्रकाश अमृतांशु डहके मतरिया रे , छछनेली तिरिया, बाबुजी बांधत बाड़न, बबुआ के लाश रे, जिनिगी के जिनिका पे रहे एगो आस रे. ढरकत लोरवा के छोरवा ना लउके, भइल सवार खून माथवा पे छउंके, पारा-पारी सभेके धोआइल जाता मंगिया, बाबुजी...
Read More– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती मंदिर में मंथन भइल, मिली जाम से मुक्ति? जाम-झाम क नाम पर, आपन-आपन युक्ति.. नगर निगम में धांधली, गेट में ताला बंद. लाठी चार्ज में बहल लहू,ऊपर से शांतिभंग.. महानगर में रोज मिलें, मरल-परल नवजात....
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