Tag: कविता

बलिया में भइल काव्य आ विचार गोष्ठी

काल्हु अतवार १४ अक्टूबर का दिने बलिया के श्रीरामविहार कालोनी स्थित “पाती” पत्रिका आ विश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया कार्यालय पर एगो विचार आ कवि गोष्ठी भइल. एह गोष्ठी में पाती पत्रिका के सितम्बर अंक के विमोचन का साथे...

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भड़ास

– ‍ नीमन सिंह दिल में गुबार एतना बा कि जहिया निकाल दी एह दुनिया के दानव के ना लागी पता हो जइहें खाक सब जल जाई. रही ना आतंक पता ना लागी आतंकी के. बस ,इंतजार बा गगरिया भर जाव कुपंथी के. भगवानो अब उब गइल होइहें देखत-देखत एह...

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तुहीं बतावऽ

– डा॰अशोक द्विवेदी तुहीं बतावऽ जागी कबलें केकरा खातिर रात-रात भर? खाए के बा अखरा रोटी सूते के बा घास-पात पर! तुहीं बतावऽ जागी कबलें केकरा खातिर रात-रात भर? अपना खातिर, तोहरा खातिर भा अझुराइल सपना खातिर विघटब-टूटन-फिसलन...

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बसन्त फागुन

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से आखिरी प्रस्तुति) – डा॰अशोक द्विवेदी धुन से सुनगुन मिलल बा भँवरन के रंग सातों खिलल तितलियन के लौट आइल चहक, चिरइयन के! फिर बगइचन के मन, मोजरियाइल अउर फसलन के देह गदराइल बन हँसल नदिया के...

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गीत

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 23वी प्रस्तुति) – रिपुसूदन श्रीवास्तव जिन्दगी हऽ कि रूई के बादर हवे, एगो ओढ़े बिछावे के चादर हवे. जवना घर में ना पहुँचे किरिन भोर के जवना आँखिन से टूटे ना लर लोर के केकरा असरे...

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