महीना: जनवरी 2011

शब्द

– प्रो. शत्रुघ्न कुमार जानत नइखी टपके लागेला कहवा से ई शब्दन के बूंद लेके हथवा में लेखनी सोचे लागिला जब जब, बन जाला सदा कगजवा पर अक्षर उहे बूंद सादा कगजवा पर तब-तब. पढ़ एकरा केहू कही नइखे एकरा में कोई बात लिखले बाड़े ई...

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यूपी विधानसभा चुनाव के बिगुल बाज गइल

यूपी में विधानसभा के चुनाव अगिला साल होखे वाला बा बाकिर बसपा अपना उम्मीदवारन के नाम तय कर के घोषित करे के शुरु कर दिहलसि. बाकी दल त अबही एह बारे में सोचलहू नइखन. बाकी दल के डर लागेला कि अबहिये नाम तय कर दिहला पर पार्टी विरोधी...

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खबरदार, श्रीनगर में तिरंगा फहरावे के जुर्रत जनि करे केहू

उमर अब्दुल्ला नइखन चाहत कि भाजपा के लोग श्रीनगर में तिरंगा फहरावसु. कहले बाड़न कि काश्मीर अबहीं शान्त बा त आग लगवला के का जरुरत बा ? साथही कहले बाड़न कि श्रीनगर में तिरंगा फहरवला से अगर कवनो अशांति भइल त ओकर जिम्मेदार तिरंगा...

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कानून का खामी से दुराचारी के सजा ना दिहल जा सकल

कबो कबो कानून का खामी से भुक्तभोगी अउरी भोगे के मजबूर हो जाला आ अपराधी आनन्द उठावेला. हालही में चीन के एगो अदालत एगो आदमी के एगो नवजवान का साथ समलैंगिक बलात्कार के दोष खातिर कवनो सजाय ना दे पावल काहे कि कानून का परिभाषा में...

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