बजलऽ ए शंख बाकिर बाबाजी के पदा के !
आखिर ऊ होइये गइल जवना के होखे के उमेद ना रहल. चउहत्तर साल के एगो बूढ़ अपना जिद्द से सरकार के झुका दिहलसि. सरकार अन्ना से निपटे में हर ऊ गलती कइलसि जवन कवनो मदान्ध सत्ता के मद में कर सकेला. पहिले त सोचलसि कि एह बूढ़ से का होई. बड़...
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