महीना: अगस्त 2013

भोजपुरी गजल

– मनोज भावुक (१) सर से हाथ हटा के देखीं , हाथ-पैर चला के देखीं, कुछ ना कुछ रस्ता निकली,बुद्धि के दउरा के देखीं पहिले त उठ्ठीं-जागीं, फिर आलस के कंबल फेकीं मन जरूर फरहर होई, दाढ़ी बाल बनवा के देखीं दूध के धोवल केहू नइखे ,सब...

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राष्‍ट्रीय भोजपुरी कवि सम्‍मेलन में ‏ देवकांत पांडेय के कविता पाठ

(१) आजादी के जश्‍न मनउला के दिन बाटे आज गली गली झंडा फहरउला के दिन बाटे आज जे सीना पर गोली खा के आजादी ले आइल ओ बीरन के गाथा गउला के दिन बाटे आज । ­­ सत्‍तावन में गदर भइल उ घाही मन के पीर रहल जंजीर गुलामी के तोड़ला के उ पहिला...

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