महीना: अगस्त 2013

बूंट के पेड़ (बतकुच्चन – १२१)

रउरा में से केहू बूंट के पेड़ देखले बा? हम त नइखीं देखले काहे कि बूंट के पेड़ होखबे ना करे पौधा होला. बूंट के पेड़ वाला किस्सा पिछला दिने बयानवीर नेता लोग के बकतूतई से धेयान में आइल. केहू बारह रुपिया में भरपेट खियावत रहे त केहू...

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अस्तित्व संकट से जूझत भोजपुरी बियाह गीत के परंपरा

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल एहमें कवनो संदेह नइखे कि लोकसाहित्य में लोकगीत के जगह सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण बाटे. जनजीवन में एकरा व्यापक प्रचार के स्वीकार करत राधावल्लभ शर्मा जी मानतानी कि ई गीत भावुक आ संवेदनशील जनता के हृदय...

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