उदय शंकर “प्रसाद” के कविता – बखारी, मजबूरी
(1) बखारी बास के चचरा गोल गोल मोडाईल ऊपर से खरई सरिया के बंधाईल माटी के लेप चचरा पे लेपाईल बखारी...
Read More(1) बखारी बास के चचरा गोल गोल मोडाईल ऊपर से खरई सरिया के बंधाईल माटी के लेप चचरा पे लेपाईल बखारी...
Read Moreभोजपुरी लोक-रंग के प्रतीकःभिखारी – डॉ0 अशोक द्विवेदी अपना समय सन्दर्भ में भिखारी ठाकुर, अपना...
Read Moreभोजपुरी दिशा-बोध के पत्रिका पाती के नयका अंक आ गइल। पेश बा ओकरा संपादक डॉ0 अशोक द्विवेदी जी के...
Read More(1) नून इक दिन बहुत हाहाकार मचल भात, दाल, तरकारी में। काहे भैया नून रूठल बा बइठक भइल थारी में।...
Read MorePosted by Editor | सितम्बर 25, 2022 | शेयर-व्यापार |
ट्रेडिंग में सफलता चाहीं त नवीन पटनायक बन के रहीं, नीतीश बने चलब त सब कुछ बिलाए वाला बा. नवीन बाबू...
Read More
पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..