भोजपुरी उपन्यास "जुगेसर" – 2
– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) -‘अरे योगेश्वर, कहां घुम तार?’ ऊ कहलन. -‘सर प्रणाम. हम समस्तीपुर जैन स्कूल में ज्वाइन कइले बानी. महीना भर भइल. रउरा कब से हईं इहां?’...
Read More– हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) -‘अरे योगेश्वर, कहां घुम तार?’ ऊ कहलन. -‘सर प्रणाम. हम समस्तीपुर जैन स्कूल में ज्वाइन कइले बानी. महीना भर भइल. रउरा कब से हईं इहां?’...
Read More(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से आखिरी प्रस्तुति) – डा॰अशोक द्विवेदी धुन से सुनगुन मिलल बा भँवरन के रंग सातों खिलल तितलियन के लौट आइल चहक, चिरइयन के! फिर बगइचन के मन, मोजरियाइल अउर फसलन के देह गदराइल बन हँसल नदिया के...
Read MorePosted by Editor | May 5, 2012 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
जिये-जियावे क सहूर सिखावत अमानुस के मानुस-मूल्य देबे वाली ‘गंगा-तरंगिनी’ ‘गंगा-तरंगिनी’ (काव्य-कथा) अभिधा प्रकाशन, मुजफ्फरपुर. मूल्य – पचास रुपये. प्रथम संस्करण. कवि – रविकेश मिश्र (पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक)...
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