Category: साहित्य

बसन्त फागुन

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से आखिरी प्रस्तुति) – डा॰अशोक द्विवेदी धुन से सुनगुन मिलल बा भँवरन के रंग सातों खिलल तितलियन के लौट आइल चहक, चिरइयन के! फिर बगइचन के मन, मोजरियाइल अउर फसलन के देह गदराइल बन हँसल नदिया के...

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गीत

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 23वी प्रस्तुति) – रिपुसूदन श्रीवास्तव जिन्दगी हऽ कि रूई के बादर हवे, एगो ओढ़े बिछावे के चादर हवे. जवना घर में ना पहुँचे किरिन भोर के जवना आँखिन से टूटे ना लर लोर के केकरा असरे...

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गीत

– मनोज भावुक बोल रे मन बोल जिन्दगी का ह … जिन्दगी का ह . आरजू मूअल, लोर बन के गम आँख से चूअल आस के उपवन बन गइल पतझड़, फूल -पतई सब डाल से टूटल … साध- सपना के दास्तां इहे , मर के भी हर बार — मन के अंगना में...

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‘गंगा-तरंगिनी’ (पुस्तक समीक्षा)

जिये-जियावे क सहूर सिखावत अमानुस के मानुस-मूल्य देबे वाली ‘गंगा-तरंगिनी’ ‘गंगा-तरंगिनी’ (काव्य-कथा) अभिधा प्रकाशन, मुजफ्फरपुर. मूल्य – पचास रुपये. प्रथम संस्करण. कवि – रविकेश मिश्र (पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक)...

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बतकुच्चन – ५७

जमाना खराब हो गइल बा. कब केकरा कवन बाति बाउर लाग जाई आ ऊ रउरा के कूटे लागी कहल ना जा सके. विदूषक, बतबनवा, लबार, कामेडियन आ कार्टूनिस्टन के पिटाए के अनेसा हमेशा बनल रहेला. हमार मुंह टेढ़ काहे बनवले, चल हम तोर मुँह टेढ़ कर देत बानी....

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