श्रेणी: साहित्य

भोजपुरीः एगो परिचय

– डा. राजेन्द्र भारती ‘भाषा भोजपुरी परिभाषा से पूरी ह बोले से पहिले एके जानल जरुरी ह न गवना पूरी ना सुहागन के चूड़ी ह साँचि मान त दुश्मन के गरदन पर चले वाली छूरी ह कहत धुरान बुरा मति माने केहू सभ भाषा के उपर हमार भाषा...

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चइत के छन्द – चइता

– डा॰अशोक द्विवेदी कोइलरि कूहे अधिरतिया आ बैरी चइत कुहुँकावे. रहि रहि पाछिल बतिया इ बैरी चइत उसुकावे. कुरुई-भरल-रस-महुवा, निझाइल कसक-कचोटत मन मेहराइल उपरा से कतना सँसतिया, आ बैरी चइत कुहुँकावे. फगुवा गइल दिन कटिया के आइल...

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बतकुच्चन – ५४

हालही में एगो कविता के कुछ लाइन पढ़े के मिलल “मटिया क गगरी पिरितिया क उझुकुन / जोगवत जिनिगी ओराइ / सगरी उमिरिया दरदिया के बखरा / छतिया के अगिया धुँआइ”. पढ़ला का बाद अपना बतकुचनिया सुभाव का चलते मन उचके लागल, सोचे लागल...

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परिचय दास के मिलल द्विवागीश सम्मान

भोजपुरी आ हिंदी के जानल मानल कवि, आलोचक, निबंधकार आ हिंदी अकादमी दिल्ली अउर मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली के सचिव रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव के भारतीय अनुवाद परिषद, दिल्ली का तरफ से “द्विवागीश सम्मान” देके सम्मानित कइल...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १७

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) सोरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि कइसे आपन दलाली वसूले का फेर में गणेश तिवारी अपने पट्टीदार फौजी तिवारी का खिलाफ पोलदना के हथियार बनवलन. बाकिर जब बाद में...

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