श्रेणी: साहित्य

अभागा

– इं॰ राजेश्वर सिंह जब केहू के कवनो मसला समझ में ना आवेला त अपने से अधिक ज्ञानी मनई से शंका समाधान करे चलि जाला अउर समस्या के बारे में पूछि-ताछि के जानकारी कइ लेला. लक्ष्मण जइसन मनइ के अभागा लोगन के पहिचान कइले में शंका...

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झरताटे चानी के फुहार

– बद्री नारायण तिवारी ‘शाण्डिल्य’ डम-डम डमरू बजावता सावनवा, झरताटे चानी के फुहार. ओढ़ले अकास चितकबरी चदरिया, मांथवा पर बन्हले बा धवरी पगरिया, झरताटे मउसम जटवा से मोतिया, गेरू रंग कान्हवा पर भिंजली कांवरिया, पियरी पहिरि बेंग...

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नीमिया रे करूवाइन

– डा॰ जनार्दन राय नीनि आइल निमन हऽ. जेकरा आँखि से इहाँ का हटि जाइला ओकर खाइल-पियल, उठल-बइठल, चलल-फिरल, मउज-मस्ती, हँसी-मजाक कुल्हि बिला जाला. अइसन जनाला कि किछु हेरा गइल बा, ओके खोजे में अदिमी रात-दिन एके कइले रहेला. निकहा...

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भोजपुरी लिखे पढ़े के कठिनाई आ काट

डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’ ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं...

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कुछु समसामयिक दोहा

– मुफलिस देइ दोहाई देश के, लेके हरि के नाम. बनि सदस्य सरकार के, लोग कमाता दाम.. लूटे में सब तेज बा, कहां देश के ज्ञान. नारा लागत बा इहे, भारत देश महान.. दीन हीन दोषी बनी, समरथ के ना दोष. सजा मिली कमजोर के, बलशाली निर्दोष.....

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