Category: साहित्य

बतकुच्चन – ५६

भाषा भोजपुरी से हमार परिचय नौ बरीस से बा. एह बीच बहुते तरह के लोग से भेंट भइल. कुछ ओह लोग से जे भोजपुरी में आपन धंधा करत बा त कुछ ओहू लोग से जे भोजपुरिए के आपन धंधा बना लिहले बा. सोचीं त दुनु में कवनो खास अंतर ना बुझाई बाकिर गौर...

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चइता

– डॉ.कमल किशोर सिंह चिकित्सक के चइता रामा कहेलें कन्हैया सुनहो प्यारी राधिका हो रामा हमरा के – मक्खन अब ना खियाव हो रामा हमरा के —— रामा खाई के मक्खनवा बढ़वनी वजनवा हो रामा , रक्त-चाप – रक्त- चाप...

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बतकुच्चन – ५५

हमरा लागत बा कि जवन हो रहल बा से ना होखे के चाहत रहुवे, जवन कहल सुनल जात बा से ना कहल सुनल चाहत रहुवे. काहें कि एह सबसे दुश्मन के सेतींहे हमनी के कमजोरी भेंटा जात बा. सेंत मेंत में हमनी का आपन कमजोरी दुनिया के देखवले बतवले जात...

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अभागा

– इं॰ राजेश्वर सिंह जब केहू के कवनो मसला समझ में ना आवेला त अपने से अधिक ज्ञानी मनई से शंका समाधान करे चलि जाला अउर समस्या के बारे में पूछि-ताछि के जानकारी कइ लेला. लक्ष्मण जइसन मनइ के अभागा लोगन के पहिचान कइले में शंका...

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झरताटे चानी के फुहार

– बद्री नारायण तिवारी ‘शाण्डिल्य’ डम-डम डमरू बजावता सावनवा, झरताटे चानी के फुहार. ओढ़ले अकास चितकबरी चदरिया, मांथवा पर बन्हले बा धवरी पगरिया, झरताटे मउसम जटवा से मोतिया, गेरू रंग कान्हवा पर भिंजली कांवरिया, पियरी पहिरि बेंग...

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