Category: साहित्य

बतकुच्चन – ५४

हालही में एगो कविता के कुछ लाइन पढ़े के मिलल “मटिया क गगरी पिरितिया क उझुकुन / जोगवत जिनिगी ओराइ / सगरी उमिरिया दरदिया के बखरा / छतिया के अगिया धुँआइ”. पढ़ला का बाद अपना बतकुचनिया सुभाव का चलते मन उचके लागल, सोचे लागल...

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परिचय दास के मिलल द्विवागीश सम्मान

भोजपुरी आ हिंदी के जानल मानल कवि, आलोचक, निबंधकार आ हिंदी अकादमी दिल्ली अउर मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली के सचिव रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव के भारतीय अनुवाद परिषद, दिल्ली का तरफ से “द्विवागीश सम्मान” देके सम्मानित कइल...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १७

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) सोरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि कइसे आपन दलाली वसूले का फेर में गणेश तिवारी अपने पट्टीदार फौजी तिवारी का खिलाफ पोलदना के हथियार बनवलन. बाकिर जब बाद में...

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धर्म: बदलत रूप बिगड़त माहौल

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 21वी प्रस्तुति) – सुशील कुमार तिवारी जइसन कि धर्म ग्रंथन में कहल गइल बा ‘धरेतिसः धर्मः’। माने कि देश अउर काल के हिसाब से उचित अनुचित के निर्धरण कइल आ ओकेरा अनुसार व्यवहार कइल...

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फागुनः दू गो गीत

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 20वी प्रस्तुति) – कमलेश राय एक अंग-अंग मिसिरी में बोर गइल फागुन रस घेर गइल! पतझर के पीरा के हियरा से बिसरा के थिरकि उठल बगियन में गांछ-गांछ अगरा के डाढि आज सगरी लरकोर भइल!...

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