चइता
– डॉ.कमल किशोर सिंह चिकित्सक के चइता रामा कहेलें कन्हैया सुनहो प्यारी राधिका हो रामा हमरा के – मक्खन अब ना खियाव हो रामा हमरा के —— रामा खाई के मक्खनवा बढ़वनी वजनवा हो रामा , रक्त-चाप – रक्त- चाप...
Read Moreहमरा लागत बा कि जवन हो रहल बा से ना होखे के चाहत रहुवे, जवन कहल सुनल जात बा से ना कहल सुनल चाहत रहुवे. काहें कि एह सबसे दुश्मन के सेतींहे हमनी के कमजोरी भेंटा जात बा. सेंत मेंत में हमनी का आपन कमजोरी दुनिया के देखवले बतवले जात...
Read More– बद्री नारायण तिवारी ‘शाण्डिल्य’ डम-डम डमरू बजावता सावनवा, झरताटे चानी के फुहार. ओढ़ले अकास चितकबरी चदरिया, मांथवा पर बन्हले बा धवरी पगरिया, झरताटे मउसम जटवा से मोतिया, गेरू रंग कान्हवा पर भिंजली कांवरिया, पियरी पहिरि बेंग...
Read More– डा॰ जनार्दन राय नीनि आइल निमन हऽ. जेकरा आँखि से इहाँ का हटि जाइला ओकर खाइल-पियल, उठल-बइठल, चलल-फिरल, मउज-मस्ती, हँसी-मजाक कुल्हि बिला जाला. अइसन जनाला कि किछु हेरा गइल बा, ओके खोजे में अदिमी रात-दिन एके कइले रहेला. निकहा...
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