भोजपुरी लिखे पढ़े के कठिनाई आ काट
डा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’ ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं...
Read Moreडा॰ प्रकाश उदय भाषा-विज्ञान में जवना के भाषा कहल जाला, तवना में, जवन कहे के होला, जतना आ जइसे, तवन कहा पाइत ततना आ तइसे, त केहू के ‘आने कि’ ‘माने कि’, ‘बूझि जा जे’ भा ‘जानि जाईं...
Read More– मुफलिस देइ दोहाई देश के, लेके हरि के नाम. बनि सदस्य सरकार के, लोग कमाता दाम.. लूटे में सब तेज बा, कहां देश के ज्ञान. नारा लागत बा इहे, भारत देश महान.. दीन हीन दोषी बनी, समरथ के ना दोष. सजा मिली कमजोर के, बलशाली निर्दोष.....
Read More– डा. राजेन्द्र भारती ‘भाषा भोजपुरी परिभाषा से पूरी ह बोले से पहिले एके जानल जरुरी ह न गवना पूरी ना सुहागन के चूड़ी ह साँचि मान त दुश्मन के गरदन पर चले वाली छूरी ह कहत धुरान बुरा मति माने केहू सभ भाषा के उपर हमार भाषा...
Read More– डा॰अशोक द्विवेदी कोइलरि कूहे अधिरतिया आ बैरी चइत कुहुँकावे. रहि रहि पाछिल बतिया इ बैरी चइत उसुकावे. कुरुई-भरल-रस-महुवा, निझाइल कसक-कचोटत मन मेहराइल उपरा से कतना सँसतिया, आ बैरी चइत कुहुँकावे. फगुवा गइल दिन कटिया के आइल...
Read Moreहालही में एगो कविता के कुछ लाइन पढ़े के मिलल “मटिया क गगरी पिरितिया क उझुकुन / जोगवत जिनिगी ओराइ / सगरी उमिरिया दरदिया के बखरा / छतिया के अगिया धुँआइ”. पढ़ला का बाद अपना बतकुचनिया सुभाव का चलते मन उचके लागल, सोचे लागल...
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