Category: साहित्य

बतकुच्चन – ४८

एक त चोरी ओह पर से सीनाजोरी. पिछला दिने कुछ कुछ अइसने वाकया देखे के मिलल जब बरियार चोर सेन्हे पर बिरहा गावे लगले. आ पहरेदार बेचारा सीटी बजावल छोड़ कुछ ना कर सकत रहे. अब चोर का बारे में थोड़ देर बाद. पहिले सेन्ह का बारे में बतिया...

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रिगवनी

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 19वी प्रस्तुति) – अनन्त प्रसाद ‘रामभरोसे’ भोजपुरिहा कतनो परेशानी में रहिहन, मोका पावते केहू से हँसी-मजाक करे से बाज ना अइहन. केहू के रिगावल आ रिगला पर लिहाड़ी लिहल, एने का लोगन...

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दू गो छोटहन कहानी

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 18वी प्रस्तुति) – विनोद द्विवेदी (एक) रोगी ले ढेर बैद मुहल्ला में रिंकू सिंह के बोखार लागल त पड़ोस के कई लोग देखे पहुँचल. केहु कहल काढ़ा, केहु कहल क्रोसिन आ केहू हकीम जी के चटनी...

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हम जरूर आइबि !

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 17वी प्रस्तुति) – गदाधर सिंह हम ओह राति में अधनिनियाँ में रहीं. अचके में हमार खटिया हिलल, खट-पट भइल आ हमार आँखि खुलि गइल. हम का देखतानी कि हमरा खाटी के ठीक लगे एगो पाँच-छव...

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बतकुच्चन – ४७

आजुकाल्हु चुनाव के मौसम बा आ बरसाती ढबुसा बेंग का तरह नेता उछल उछल के टरटरात बाड़े. सभे लागल बा एक दोसरा के भकठा बतावे, साबित करे में आ अपना के दूधे नहाइल बतावे में. अब सोचीं त भकठा के मतलब होला बिगड़ल, खराब. आ जे अइसन होला ओकरा...

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