Category: साहित्य

दू गो छोटहन कहानी

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 18वी प्रस्तुति) – विनोद द्विवेदी (एक) रोगी ले ढेर बैद मुहल्ला में रिंकू सिंह के बोखार लागल त पड़ोस के कई लोग देखे पहुँचल. केहु कहल काढ़ा, केहु कहल क्रोसिन आ केहू हकीम जी के चटनी...

Read More

हम जरूर आइबि !

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 17वी प्रस्तुति) – गदाधर सिंह हम ओह राति में अधनिनियाँ में रहीं. अचके में हमार खटिया हिलल, खट-पट भइल आ हमार आँखि खुलि गइल. हम का देखतानी कि हमरा खाटी के ठीक लगे एगो पाँच-छव...

Read More

बतकुच्चन – ४७

आजुकाल्हु चुनाव के मौसम बा आ बरसाती ढबुसा बेंग का तरह नेता उछल उछल के टरटरात बाड़े. सभे लागल बा एक दोसरा के भकठा बतावे, साबित करे में आ अपना के दूधे नहाइल बतावे में. अब सोचीं त भकठा के मतलब होला बिगड़ल, खराब. आ जे अइसन होला ओकरा...

Read More

राघव मास्टर

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 16वी प्रस्तुति) – गिरिजा शंकर राय ‘गिरिजेश’ गांव में प्राइमरी स्कूल खुलते चारो ओर खुशी के वातावरण छा गइल. एकरा ले पहिले सब डेढ़गांवा जात रहे. जहिया ना जायेके मन करे कोइरिया का...

Read More

बतकुच्चन – ४६

पिछला बेर आखिर में पूरा पर पूरा कतार बन गइल रहे बाकिर चरचा ना चलल रहे. आजु ओहि पुर से पूर के सफर पर चलल जाव. पुर कहल जाला नगर भा शहर के बाकिर एकर इस्तेमाल कवनो शब्द का अन्त में प्रत्यय के रूप में बेसी होला, जइसे कि भागलपुर,...

Read More

Recent Posts