बतकुच्चन – ५३
एगो कहाउत ह “राड़, साँढ़, सीढ़ी, सन्यासी | एहसे बचे त सेवे काशी”. कहाउत कहल त गइल बा काशी का बारे में जहाँ के राड़, ठग, सीढ़ी आ साधु सबही एकसे बढ़िके एक होलें. बतकु्च्चन में राड़ आ राँड़ के फरक के चरचा पहिले हो चुकल बा. एह...
Read Moreएगो कहाउत ह “राड़, साँढ़, सीढ़ी, सन्यासी | एहसे बचे त सेवे काशी”. कहाउत कहल त गइल बा काशी का बारे में जहाँ के राड़, ठग, सीढ़ी आ साधु सबही एकसे बढ़िके एक होलें. बतकु्च्चन में राड़ आ राँड़ के फरक के चरचा पहिले हो चुकल बा. एह...
Read Moreपिछला दिने भइल चुनाव परिणाम अवते यूपी में जीते वाला दल के समर्थक बवाल, खुराफात कइल शुरू कर दिहले. आलोचना होखे लागल त ओह लोग के नेता कहलन कि ई सब उनुका पार्टीवालन के खुराफात ना ह, ई त हारल पार्टी के खुरचाल के नतीजा ह. हँ हँ मानत...
Read Moreफगुआ बीतल चइत आ गइल. फगुआ का दिने निकलल होरिहारन के टोली भर दिन फगुआ गवला का बाद चइता गा के नयका साल के स्वागत कइलन. फगुआ आ चइता दुनु के शुरुआत हमेशा देवी वन्दना से होला. सुमिरिले मतवा, जोड़ीले दुनु हथवा हो रामा/ कण्ठे सुरवा/...
Read MorePosted by Editor | Mar 8, 2012 | पुस्तक चर्चा |
भारत के समाचार पत्र निबंधक के कार्यालय से मिलल जानकारी का हिसाब से देश में भोजपुरी के तैंतीस गो प्रकाशन पंजीकृत बाड़ी सँ. भोजपुरी प्रकाशन के एगो सामूहिक मंच दिलावे खातिर सोचत बानी कि एह सगरी पत्र पत्रिका के प्रकाशक, संपादक आ...
Read More– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल एक लागेला रस में बोथाइल परनवा ढरकावे घइली पिरितिया के फाग रे ! धरती लुटावेली अँजुरी से सोनवा बरिसावे अमिरित गगनवा से चनवा इठलाले पाके जवानी अँजोरिया गावेला पात पात प्रीत के बिहाग रे. पियरी पहिरि...
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