ए माई !
– ओ.पी. अमृतांशु नवमी के दिने देवी लेली बलिदनवा, खस्सिया पे चले तलवार होऽऽऽ. करेले बकरिया गोहारऽ ए माई, करेले बकरिया गोहार होऽऽऽ. बड़ी रे ललसवा से दिहलीं जनमवा, चुमी-चाटी बबुआ के संझिया-बिहनवा,...
Read MorePosted by Editor | Sep 29, 2011 | पुस्तक चर्चा |
पाती के नयका अंक बेहतरीन कागज पर बढ़िया सफाई का साथ प्रकाशित भइल बा. बाकिर कुछ तकनीकि गलती से एकर सूची वाला पन्ना के पीडीएफ पढ़ात नइखे. अह अंक में बावे नया लोकतंत्र के सपना (संपादकीय), लोकतंत्र में लोकभावना के बेमिसाल जीत (अन्ना...
Read More(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) बारहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं त्रिपाठी जी के चरचा आ इहो कि लोक कवि कइसे घबड़इले जब पता चलल कि उनुका भतीजा के एड्स हो गइल बा. ओकरा के तुरते बंबई भिजवा दिहले एह...
Read More– डा॰अशोक द्विवेदी सिंहासन पर बइठल राजा के अझुराइल रहला खातिर जुटावल जाला कतने सरंजाम. जइसे मारकाट के खेल भुखाइल, खूनी बाघ से निहत्था आदमी क लड़ाई. जइसे नाच गाना के महफिल आ शेरो-शायरी से बड़ाई खास नर्तकियन के पेशी. पाँच...
Read MorePosted by Editor | Sep 28, 2011 | पुस्तक चर्चा |
लखनऊ के नौंवा राष्ट्रीय पुस्तक मेला में भोजपुरी के साप्ताहिक पत्रिका “भोजपुरिया अमन” के विमोचन करत आकाशवाणी के पूर्व निर्देशक आ मशहूर साहित्यकार मदन मोहन मनुज सिन्हा कहले कि लोक साहित्य वाली भाषा सभन के धीरे धीरे...
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