Category: साहित्य

बतकुच्चन २४

का होई जब राउर टहलुआ रउरे के टहलावे लागे ? टहलुआ ऊ जे टहल करे, सेवा करे, राउर छोट मोट काम रउरा कहला पर कइल करे. टहलुआ के स्त्रीलिंग टहलनी होला. सेवा टहल करे खातिर जनता अपना सांसद विधायकन के चुनेले बाकिर चुनाते ऊ लोग चुने वालन के...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १२

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) एगरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं गाँवे से लवटि के लखनऊ चहँपलो पर लोक कवि के शानदार स्वागत भइल. सम्मान मिलला का बाद लोक कवि के भाव अउरियो बढ़ि गइल रहे आ लोक कवि के...

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बतकुच्चन २०

पिछला पखवारे राजनीतिक हिसाब से बहुते हंगामेदार रहल. एह बीच कुछ लोग माल सरका के सरकार से सरकि लिहले त कुछ लोग अपना सरकावे का काबिलियत का चलते सरकार में घुसे के हिसाब किताब लगावे में लागल रहले. अलग बाति बा कि उनकर चलल ना. अब सरकल...

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बतकुच्चन – १९

आजु जब हम ई बतकुच्चन लिखे बइठल बानी त खबर चल रहल बा कि सुप्रीम कोर्ट करिया धन पर स्पेशल जाँच दल बना दिहले बिया. ओकर कहना बा कि सरकार बिना खरकोंचले कुछ करत नइखे. हँ हँ मानत बानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश में खरकोंचल शब्द नइखे बाकिर...

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लोक कवि अब गाते नहीं – ११

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) दसवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं सम्मान मिलला बाद अपना गाँवे चहुँपल लोक कवि के एगो पंडित के कहल नचनिया पदनिया के बात कतना खराब लागल रहे. बाकिर चेयरमैन साहब का...

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