श्रेणी: साहित्य

विमल के दू गो रचना

– रामरक्षा मिश्र विमल (1) गीत टनटनात माथ जहर लागेला घाम हाय राम एहू पर दूब के सुतार. रउँदेले सुबह शाम घुमवइया लोग बकरी लगावेलिन ठाकुर के भोग तबहूँ ना कवनो गोहार हाय राम कइसन ई ममता दुलार. बीछे बनिहारिन बेमोह भरल खेत खुरपी...

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पाती के नयका अंक

भोजपुरी दिशाबोध के पत्रिका पाती के नयका अंक रउरा लोग का सेवा में पेश बा. भोजपुरी साहित्य के पत्रिका “पाती” के भोजपुरी जगत में आपन एगो अलगे सम्मानजनक जगहा बा. हर अंक में एक से बढ़ के एक पढ़े लायक सामग्री मिलेला. पाती...

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एन.आर .आई

– डॉ. कमल किशोर सिंह परदेसवा के पीड़ा का सुनाईं ऐ भईया . जिया चारा जस जाला छटपटाई ऐ भईया. जिनगी लागे एगो लमहर लड़ाई ऐ भईया, चोट कहाँ-कहाँ लागल का बताईं ऐ भईया . घाव दिलवा के देला ना दिखाई  ऐ भईया , बाकी छिपे नाहीं कतनो...

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ये  दुलहा

– ओ.पी .अमृतांशु पाकल मोछवा बोकावा के पोंछवा रुपवा गोबरे लिपावल ! ये  दुलहा. माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा. अइलऽ गदहिया पे, नाहीं तू नहइलऽ, आखीं कजरवा ना माई से करइलऽ, उबड़-खाबड़ बाटे लिलारवा चूनवा वोही पे टिकावल...

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बतकुच्चन – १४

जमाना औचक चहुँप के भौचक करे के चल रहल बा त सोचनी आजु एही चक पर कुछ बकचक कइल जाव. चक कहल जाला जमीन के कवनो बड़का खण्ड के आ एही से जमीन के छोट छोट टुकड़ा मिला के चक बनावल जाला त ओकरा के चकबन्दी कहल जाला. अब चकबन्दी के शाब्दिक अर्थ त...

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