श्रेणी: साहित्य

बतकुच्चन – १३

पहुँचा कहल जाला हाथ का हथेली के जोड़ वाली जगह, कलाई के भा मणिबन्ध के. आ पहूँची कहल जाला एगो खास तरह के गहना के जवन कलाई पर पहिरल जाला. भोजपुरी में एगो कहाउत ह पँहुचा पकड़त गरदन पकड़ लिहल. कुछ लोग पहिले त राउर सहारा लेबे खातिर राउर...

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बतकुच्चन – १२

तेरह तारीख के चुनाव परिणाम सुनत एगो बाति दिमाग में घूमे लागल. बंगाल में दीदी जीत गइली, तमिलनाडु में अम्मा. राजनीति में सत्ता के गलियारन तक पहुँचे वाला लोग में कबो कवनो भउजी आइल होखसु से याद नइखे आवत. पिछला हफ्ता बात त पहुँचा,...

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लोक कवि अब गाते नहीं – ९

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) आठवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि सम्मानित भइला का बाद जब लोक कवि अपना गाँवे अइलन त उनुकरा स्वागत में लागल औरतन में उनुकर बालसखी राधो रहली. जेकर असल नाम त रहे...

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बतकुच्चन – ११

पिछला हफ्ता गोबर पथार के बात निकलल रहे त अबकी खर पतवार दिमाग में आ गइल बा. खर पतवार का बारे में सोचते दिमाग में खरखर होखे लागल जइसे कि मूंजियानी से गुजरत घरी आवाज निकलेला. अइसने खरखर से संस्कृत के एगो शब्द बनल रहे खर्पर. खर्पर...

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मुस्लिम तुष्टिकरण राष्ट्रहित पर भारी पड़त बा

एगो जायज सवाल उठावल जात बा कि आखिर जिन्ना के मुंबई बंगला भारत सरकार उनका के, भा बाद में उनुका वारिसन के काहे ना लवटवलसि ? का एह चलते कि भारत के बँटवारा का बाद जिन्ना भारत के घोषित दुश्मन हो गइल रहले आ उनकर संपत्ति दुश्मन के...

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