एन.आर .आई
– डॉ. कमल किशोर सिंह परदेसवा के पीड़ा का सुनाईं ऐ भईया . जिया चारा जस जाला छटपटाई ऐ भईया. जिनगी लागे एगो लमहर लड़ाई ऐ भईया, चोट कहाँ-कहाँ लागल का बताईं ऐ भईया . घाव दिलवा के देला ना दिखाई ऐ भईया , बाकी छिपे नाहीं कतनो...
Read Moreजमाना औचक चहुँप के भौचक करे के चल रहल बा त सोचनी आजु एही चक पर कुछ बकचक कइल जाव. चक कहल जाला जमीन के कवनो बड़का खण्ड के आ एही से जमीन के छोट छोट टुकड़ा मिला के चक बनावल जाला त ओकरा के चकबन्दी कहल जाला. अब चकबन्दी के शाब्दिक अर्थ त...
Read Moreपहुँचा कहल जाला हाथ का हथेली के जोड़ वाली जगह, कलाई के भा मणिबन्ध के. आ पहूँची कहल जाला एगो खास तरह के गहना के जवन कलाई पर पहिरल जाला. भोजपुरी में एगो कहाउत ह पँहुचा पकड़त गरदन पकड़ लिहल. कुछ लोग पहिले त राउर सहारा लेबे खातिर राउर...
Read Moreतेरह तारीख के चुनाव परिणाम सुनत एगो बाति दिमाग में घूमे लागल. बंगाल में दीदी जीत गइली, तमिलनाडु में अम्मा. राजनीति में सत्ता के गलियारन तक पहुँचे वाला लोग में कबो कवनो भउजी आइल होखसु से याद नइखे आवत. पिछला हफ्ता बात त पहुँचा,...
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